Thursday, October 28, 2021
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रामायण और श्रीराम को सत्य नहीं मानते जीतनराम मांझी

कहा, रामायण एक काल्पनिक ग्रंथ, लेकिन पाठ्यक्रम में किया जाये शामिल

जीतनराम मांझी के बयान पर शुरू हुआ विवाद

पटना। रामायण एक काल्पनिक ग्रंथ है और मैं रामायण की कहानी को सत्य नहीं मानता। श्रीराम महापुरुष थे और जीवित थे, इस बात को भी मैं नहीं मानता। यह कहना है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ( Jitan Ram Manjhi) जो राम के अस्तित्व को तो नकराते हैं मगर रामायण को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात भी कहते हैं।

हिंदुस्तान के कोने-कोने में प्रभु श्रीराम को पूजा जाता है और रामायण का पाठ करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है। प्रभु श्रीराम को आदर्श मानने वालों की कमी नहीं है। मगर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ( Jitan Ram Manjhi) ने राम के देश में राम के ही अस्तित्व को नकार दिया। अब अपने बयान पर जीनत राम मांझी को चैतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि बिहार के स्कूली सिलेबस में रामायण को शामिल करने की मांग की जा रही है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने पुरजोर तरीके से कहा है बिहार के स्कूलों और काॅलेजों के सिलेबस में भगवान श्री राम से जुड़ी तमाम जानकारियों को शामिल किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान श्री राम के बारे में जान सकें।

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मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने रामायण को काल्पनिक ग्रंथ बताते हुए श्रीराम को महापुरूष और जीवित मानने से ही इंकार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि रामायण में कही गयी बातें सीखने और जानने लायक है इसलिये उसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिये।

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मांझी के बयान पर भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा है कि श्रीराम की सत्यता को कोई नकार नहीं सकता। रामसेतु के अस्तित्व नासा ने भी सही माना है। वहीं राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भाजपा बताये कि श्री मांझी के बयान को वह किस रूप में लेती है। इस प्रकरण पर कांग्रेस नेता राजेश राठौर ने रामायण पर राजनीति न करने की बात कही। नहीं होनी चाहिए। मांझी के बयान से परेशानी में आयी जेडीयू सरकार में शिक्षा मंत्री विजय चैधरी इस मामले से पल्ला झाड़ते दिखे। उन्होंने कहा कि जब ऐसा कोई प्रस्ताव आयेगा तो देखा जायेगा।

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