अमित बिश्नोई
कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं देश के प्रमुख उद्योगपति यदुपति सिंहानिया के निधन से खेल एवं उद्योग जगत में शोक की लहर फैल गई है. यदुपति सिंहानिया का गुरुवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह काफी समय से गुर्दे की बीमारी से ग्रसित थे. दस वर्ष पूर्व उनका सिंगापुर के ही अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का आपरेशन हुआ था. सिंहानिया परिवार के राघवपत और माधवकृष्ण सिंहानिया के अनुसार यदुपति जी का अंतिम संस्कार सिंगापुर में ही किया जाएगा. वह ६७ वर्ष के थे. यदुपति के कोई संतान नही थी. उनके घर में उनकी पत्नी कविता सिंहानिया हैं.
कमला क्लब में दी गई श्रद्धांजलि
यदुपति सिंहानिया के निधन की सूचना मिलते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई. यूपीसीए मुख्यालय में एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने भारी मन से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. यूपीसीए के सीओओ दीपक शर्मा ने डा. गौर हरि सिंहानियां क्रिकेट अकादमी के सभागार में एसोसिएशन की तरफ से एक शोक सभा का आयोजन किया. जिसमें उन्होंने यदुपति जी के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डाला. इसके बाद सभा में दो मिनट का मौन रखा गया. शोक सभा में प्रमुख रूप से विनीत गुप्ता, अनुराग गुप्ता, राजीव प्रधान, मनोज मेहरोत्रा, श्रेयांस, शिवकुमार, भूपेंद्र सिंह, वंदना, शिखा, अविजित दुबे, सिद्धार्थ, के. के. अवस्थी, रवि शुक्ला, बिंदा सहित यूपीसीए का सभी स्टाफ मौजूद था. शोक सभा के बाद आफिस में अवकाश कर दिया गया.
यदुपति में दिखती थी गौर बाबू की झलक
उत्तर प्रदेश में क्रिकेट को विकसित करने का श्रेय शहर के सिंहानिया परिवार को ही जाता है. पदमपत सिंहानिया के बाद उनके पुत्र गौरहरि सिंहानिया और फिर यदुपति सिंहानिया ने प्रदेश में क्रिकेट को शिखर तक पहुंचाने का काम किया. यदुपति की कार्य शैली अपने पिता गौर बाबू से काफी मिलती जुलती थी. प्रदेश में क्रिकेट के पितामाह कहे जाने वाले गौर हरि सिंघानिया की मृत्यु के बाद वर्ष 2015 में यदुपति को यूपीसीए कानपुर का अध्यक्ष चुना गया था. उन्ही के नेतृत्व का नतीजा था कि उत्तर प्रदेश के ग्रीनपार्क स्टेडियम ने पहली बार आईपीएल मुकाबलों की मेजबानी हासिल की थी. ग्रीनपार्क में पहला अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच के अलावा भारतीय टीम के इतिहास का 500वां टेस्ट मैच का सफल आयोजन करने का श्रेय भी यदुपति जी को ही जाता है. इसके अलावा उन्होंने लखनऊ में इकाना स्टेडियम को भी प्रदेश का दूसरा क्रिकेट स्टेडियम होने का नाम भी इतिहास के पन्नों में दर्ज करवाया. इस स्टेडियम में अभी तक कई अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं. यदुपति जी अपने खराब स्वास्थ्य के कारण हालांकि बैठकों में या मैच के दौरान कम ही दिखते थे लेकिन वह फोन से लगातार पूरी जानकारी लेते रहते थे. वह जब भी कभी स्टेडियम आते थे तो अपने पिता की तरह ही सबसे पहले स्टुडेंट गैलरी की तरफ देखते थे. उनका मानना था कि मैच के दौरान स्टुडेंट व स्कूली बच्चों को फ्री में मैच दिखाने की व्यवस्था कायम रहे. गौरतलब है कि ग्रीनपार्क में पिछले कई टेस्ट मैचों में स्कूली बच्चों को मुफ्त में मैच दिखाया गया जिसका श्रेय यदुपति जी को ही जाता है.
कोट एंड कमेंट
१- खेल एवं उद्योग जगत के लिए यह एक बहुत बड़ी क्षति है। खेल एवं उद्योग में उनके योगदान की भरपायी नहीं की जा सकती। हमारे लिए यह एक तरह से व्यक्तिगत क्षति है। वह हमारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं। — राजीव शुक्ला (निदेशक, यूपीसीए)
२- प्रदेश क्रिकेट एसोसियेशन में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। क्रिकेट से उनका और उनके परिवार का काफी पुराना नाता रहा है। उनके अच्छे कार्यो को याद करते हुए हम अपनी एसोसिएशन के लिए और बेहतर कार्य करेंगे। – युद्धवीर सिंह (सचिव, यूपीसीए)
३- सिंहानिया परिवार शहर का पहला परिवार है जिसने हर क्षेत्र में कानपुर को बुलंदियों तक पहुंचाया है। यकीनन यदुपति जी के निधन से हम सभी को काफी अपूर्णनीय क्षति हुई है। उन्होंने प्रदेश में क्रिकेट का स्तर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रभु उन्हें अपने चरणों में स्थान दे। – संजय कपूर (चेयरमैन, केसीए)
४- प्रदेश के क्रिकेट और कानपुर के क्रिकेट को यदुपति सर ने ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उनके निधन से कानपुर जगत के क्रिकेट की बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने हमेशा मुझे अच्छे से अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। मैं ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। – कुलदीप यादव (भारतीय क्रिकेटर)
५- सिंघानिया परिवार ने शहर के क्रिकेट को ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यदि यह परिवार ना होता तो शहर में क्रिकेट का इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचना असंभव था। यदुपति जी ने क्रिकेट के विकास और शहर के युवाओं को हमेशा आगे बढ़ाया है। आज उनके चले जाने से बेहद दुखी हूं और अपनी श्रद्धांजलि उन्हें अर्पित करता हूं । – गोपाल शर्मा (पूर्व भारतीय क्रिकेटर)

