नई दिल्ली: आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की कथनी और करनी किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ वो आतंकवाद के खिलाफ मुहिम चलाने की बड़ी बड़ी बात करता है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भारत की लगातार कोशिश के बाद उसे एफएटीएफ ने ग्रे लिस्ट में डाला है। शुक्रवार को एफएटीएफ की बैठक से पाकिस्तान को खुद के लिए राहत की उम्मीद थी। लेकिन उसका ग्रे लिस्ट का दर्जा बरकरार है।
FATF का संबंध देश की वित्तीय प्रणाली को नियंत्रित करने वाले तंत्र की मजबूती से है ताकि उनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण जैसी गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सके। तथाकथित ‘ग्रे लिस्ट’ में वास्तव में वे देश शामिल हैं जो एफएटीएफ को लगता है कि “बढ़ी हुई निगरानी” के तहत होना चाहिए, भले ही वे एफएटीएफ के साथ “धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए अपने शासन में रणनीतिक कमियों को दूर करने के लिए” संलग्न हों।ग्रे लिस्ट को किसी भी देश के लिए चेतावनी नोट के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इस तरह के पदनाम का अर्थ यह भी है कि “यह सहमत समय सीमा के भीतर पहचानी गई रणनीतिक कमियों को तेजी से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है”।

