Site icon Buziness Bytes Hindi

हटने लगे किसानों के टेंट, खत्म हो रहे लंगर


हटने लगे किसानों के टेंट, खत्म हो रहे लंगर

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। जैसा की आपकी प्रिय वेबसाइट बिजनेस बाइट्स ने कल प्रकाशित आर्टिकल ”किसानों ने ही खत्म कर दिया किसान आंदोलन!“ में यह संभावना जताई थी कि दिल्ली में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन को आगे चलाना मुश्किल होगा आज वह बात सही होती दिख रही है। दिल्ली की सीमाओं पर से किसानों के टेंट हटते दिख रहे हैं।

वहीं किसान संगठनों के आंदोलन से अलग होने के ऐलान के बाद इस आंदोलन में पड़ी फूट भी स्पष्ट रूप से दिख रही है। ऐेसे में आने वाले समय में आंदोलन जारी रखना असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर है। क्योंकि अपने ऊपर दर्ज मुकदमों और संभावित कानूनी कार्रवाई के चलते किसान नेता भी अब बेबाक होकर आंदोलन नहीं चला पायेंगे। वहीं पहले की तरह आंदोलन को समर्थन भी मिल पाना मुश्किल लग रहा है।

गणतंत्र दिवस पर किसानों के द्वारा दिल्ली में किये गये उपद्रव के बाद कानूनी शिकंजें में घिर गये किसान संगठनों में अफरा-तफरी का माहौल है। आज राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने खुद को आंदोलन से अलग करने का ऐलान कर दिया। इसके बाद चिल्ला बार्डर से किसानों ने अपने टेंट भी उखाड़ने शुरू कर दिये हैं।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के चीफ वीएम सिंह ने तो साफ तौर पर कहा कि दिल्ली में जो हंगामा और हिंसा हुई, उसकी जिम्मेदारी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को लेनी चाहिए। हम ऐसे किसी शख्स के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो। वहीं भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उससे मैं बहुत दुखी हूं और 58 दिनों का हमारा प्रोटेस्ट खत्म कर रहा हूं।

इन दो संगठनों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जो कल की घटना से दुखी हैं और निराश होकर घर वापसी की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन के लिए लगाए गए टेंटों को किसानों ने हटाया शुरू कर दिया है। ऐसे में कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर तकरीबन दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन खत्म होता दिखाई दे रहा है। यूपी गेट में चल रहे लंगर और लगाए गए टेंट भी अब हटने लगे हैं।

Exit mobile version