भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, समर्थन मूल्य महंगाई को कवर नहीं करता
मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी महंगाई को कवर नहीं करती। किसानों की फसल मंडी में लुट रही है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, देश को खुशहाल बनाने के लिये सरकार को किसान हित में कार्य करना होगा।
खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में केंद्र सरकार द्वारा की गयी बढ़ोतरी को भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत नाकाफी बताया है। राकेश टिकैत के अनुसार कुछ फसलों जैसे मक्का में 20 रुपये धान में 72 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि करना समर्थन मूल्य का सबसे बड़ा मजाक है। जब किसान को दालों का समर्थन मूल्य मिलता ही नहीं, तो घोषित करने से क्या लाभ है।
किसानों की फसल मंडी में लुट रही है और सरकार चुपचाप देख रही है। राकेश टिठकैत ने कहा यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाये जाना देश के किसानों की मांग है। इस मांग को पूरा कराने के लिए किसान सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद कर किसानों के आंदोलन को समाप्त कर उनकी उन्नति के लिए कार्य करें।
भाकियू (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैधरी संजीव तोमर ने भी धान के घोषित मूल्य को नाकाफी बताया। उनका कहना है कि धान का मूल्य तीन हजार रुपये प्रति कुंतल होने से ही किसान को लाभ मिल सकेगा। मंडी में गेहूं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बिक रहा है। वहीं बिजली, डीजल, खाद, रसायन के दाम बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में किसान तो हर तरफ से परेशान है।

