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Exclusive : करियर की शुरुआत में राइफल और पिस्टल में अंतर भी नहीं जानती थीं राही


Exclusive : करियर की शुरुआत में राइफल और पिस्टल में अंतर भी नहीं जानती थीं राही

स्पॉट्स डेस्क

ओलंपिक का टिकट हासिल कर चुकी भारतीय निशानेबाज राही सरनोबत ने आईएसएसएफ विश्व कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में सोमवार को गोल्ड जीतकर भारत को अच्छी खबर दी है. राही सरनोबत भारतीय 15 मीटर पिस्टल शूटिंग की महारथी हैं. राही पिस्टल शूटिंग में वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय हैं और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं. साल 2011 जब उन्होंने आईएसएसएफ वल्र्ड कप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था तब वह 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए ओलंपिक गेम्स में क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला भी बनी थीं।

6 महीने में झलकने लगी प्रतिभा
महाराष्ट्र के कोल्हापुर गांव में जन्मी राही का मनोबल उनके मित्रों और साथी शूटर तेजस्विनी सावंत ने बढ़ाया था और इसी वजह से उन्होंने खेल को करियर बनाने की सोची. हालांकि सावंत एक राइफल शूटर हैं और जब राही ने पहली बार रेंज में कदम रखे तो उन्हें पिस्टल और राइफल में अंतर नहीं पता था और उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे जो हाथ आया उसे ही उठा लिया. राही का कौशल 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद ही झलकने लगा और उन्होंने कम समय में ही नेशनल शूटिंग कैंप में पिस्टल वर्ग में दो गोल्ड और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. इसके बाद जर्मनी में उन्होंने जूनियर चैंपियनशिप का सुपर कप भी हासिल किया।

और छूने लगीं बुलंदी
राही के युवा करियर ने बुलंदी तो तब छुई जब उन्होंने 25 मीटर पिस्टल इवेंट में कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में गोल्ड मेडल पर अपने नाम की मुहर लगाई. इसके बाद राही ने अपनी राह इवेंट के लिए बनाई और 25 मीटर पिस्टल वर्ग में ही अनीसा सैयद के साथ गोल्ड मेडल जीता और एक व्यक्तिगत सिल्वर भी अपने हक में किया. राही के अलावा उनकी मित्र तेजस्विनी सावंत ने भी उस संस्करण में दो सिल्वर मेडल जीते थे और निश्चित तौर पर इन दोनों ही खिलाडिय़ों के लिए वो पल यादगार रहे होंगे।

लंदन ओलंपिक में दिखाया दम
अगर देखा जाए तो वह समय राही के लिए अच्छा था और उन्होंने अपनी पीक की ओर जाना शुरू कर दिया था. इसके बाद फोर्ट बेन्निंग में ब्रॉन्ज़ जीता और वह खुशनुमा पल तो तब आया जब 21 साल की इस शूटर ने लंदन ओलंपिक गेम्स में अपने कदम रखे. ओलंपिक गेम्स में राही ने कुल 579 अंक जोड़े और 19ववें स्थान पर अपनी प्रतियोगिता का अंत किया. वह केवल 4 अंकों से फाइनल कट बनाने से असफल रहीं लेकिन उन्होंने खेल बहुत चतुराई से खेला और सभी ने उनके कौशल की तारीफ भी की।

दूर कीं कमियां
कहते हैं न कि एक खिलाड़ी तब तक संतुष्ट नही होता जब तक वह सब कुछ हासिल न कर ले, यही सरनोबत के साथ भी हुआ और ओलंपिक गेम्स से लौटने के बाद उन्होंने रेंज में जाकर अपनी कमियों को दूर किया. अब बारी थी 2013 आईएसएसएफ वल्र्ड कप की जो साउथ कोरिया की सरजमी पर हो रहा था. इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए लोकल कियॉन्गे किम को मात दी और खिताबी जीत अपने नाम की. इसी के साथ सरनोबत पिस्टल शूटिंग में वल्र्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय शूटर बन गई थी।

पक्का है निशाना
यहां से इस शूटर का निशाना पक्का होता जा रहा था और जज्बों में जीत की ललक बढती जा रही थी. 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में राही ने एक और गोल्ड मेडल हासिल किया और उसी साल एशियन गेम्स में पहला ब्रॉन्ज मेडल जीतने में कामयाब रहीं. साल 2017 में सरनोबत की लय धुंधली पड़ गई थी, लेकिन उसी समय नेशनल टीम में बुलावे की वजह से उन्हें और उनके करियर को एक और मौका मिला था. उसी साल मुन्खबयार दोर्जसुरेन ने उन्हें कोचिंग भी दी. गौरतलब है कि मुन्खबयार दोर्जसुरेन ओलंपिक गेम्स में दो बार ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं. इस कोच और खिलाड़ी ने लंदन गेम्स में एक दूसरे के खिलाफ स्पर्धा भी की थी लेकिन अब किरदार बदल चुके थे. मुन्खबयार दोर्जसुरेन सरनोबत का बखूबी साथ निभाया और उन्हें हर बार सपोर्ट किया।

मिला मेहनत का फल
इस मेहनत का फल उन्हें 2018 में मिला जहां फाइनल में थाईलैंड के नेफ्सवान यांगपिबून से कड़ा मुकाबला हुआ. निशाना सामने था और आंखों में जीत की भूख लिए इस खिलाड़ी ने शूट आउट में कदम रखे. इस मुकाबले में दो बार शूट आउट हुआ और दूसरी बार में सरनोबत ने एक अंक ज़्यादा लेकर पोडियम के अव्वल स्थान पर अपना हक जमाया. इस खिताबी जीत से राही सरनोबत एशियन गेम्स में गोल्ड हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनीं. इतना ही नहीं इसके बाद महाराष्ट्र की इस शूटर को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मानसिक रूप से तैयार
इरादे पक्के हों तो कुछ भी हो सकता है और इन्ही इरादों की मदद से सरनोबत ने वल्र्ड कप में गोल्ड मेडल जीता और टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई भी किया. इसी इवेंट के लिए वह पिछले तीन सालों से अभ्यास कर रही हैं और मानसिक रूप से खुद को तैयार भी कर रही हैं. रही सरनोबत ने कहा, मेरे ख्याल से शूटिंग तकनीक से ज़्यादा मानसिक ताकत से चलता है क्योंकि हर शूटर स्पर्धा कर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए तैयार होता है. इसमें ये मायने रखता है कि आप इस चुनौती को कैसे लेते हैं।

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