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Exclusive : ऑनलाइन गेम्स का शौक़, बिगाड़ रहा दिमाग का खेल

अमित बिश्‍नोई

लॉकडाउन के दौरान बच्चों के हाथ में आया मोबाइल ने अब उनके दिमाग से खेलना शुरु कर दिया है. ऑनलाइन गेम्स के नशे ने बच्चों का अपना शिकार बना लिया है. जिसकी वजह से न केवल उनकी मेंटल हैल्थ प्रभावित हो रही है बल्कि घर रहकर बच्चों में एग्रेशन के मामलों में भी खासी बढ़ोत्तरी हुई है.

यही नहीं अकेलापन और दूसरी बीमारियां भी अब उन्हें घेरने लगी है. ये चौंकाने वाला खुलासा मेंटल हैल्थ विभाग की स्टडी रिपोर्ट में हुआ है. आंकड़ों पर गौर तो शहर में बच्चे तेजी से गेम एडिक्शन का शिकार हो रहे है. लॉकडाउन के दौरान घर रहकर इसका असर व्यापक स्तर पर हुआ है. एक्सपट्र्स के मुताबिक ये स्थिति काफी गंंभीर है. अगर बच्चों को नहीं रोका गया तो परिणाम घातक हो सकते है.

ये है स्टडी रिपोर्ट

मेंटल हैल्थ विभाग की स्टडी रिपोर्ट के अुनसार करीब 70 प्रतिशत बच्चे मोबाइल या दूसरे गैजेट्स के जरिए वीडियो गेम्स या ऑनलाइन गेम्स के एडिक्शन से जूझ रहे है. मेंटल हैल्थ ओपीडी में आने वाले 10 में से 7 बच्चों में वीडियो गेम या मोबाइल गेम खेलने की प्रवृति विकसित हो रही है. जबकि पिछले दो से तीन सालों में ये आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ा है. मनकक्ष इंचार्ज डा. विभा नागर बताती हैं कि जहां  पहले 10 में से 3 या 4 बच्चों में इस तरह की समस्या थी वहीं अब ये स्थिति दो गुनी हो चुकी है.

शौक बन रहा नशा

वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डा. रवि राणा बताते हैं कि गेमिंग में एक तरह का एडिक्शन होता है. स्मार्टफोन आने के बाद ये एडिक्शन बच्चों में बहुत तेजी से डेवलप हुआ है. इन दिनों में तमाम तरह के गेम्स मोबाइल में एवलेबेल हैं. एक बार इनका अगर बच्चों को चस्का लग गया तब दिन-रात वह इन्हीं के चक्कर में लग जाते हैं. यहां तक की सोते हुए या सुबह उठकर भी उनके दिमाग में इन्हीं की प्लानिंग चल रही होती है. शुरुआती पीरियड में पैरेंट्स  केयर नहीं करते हैं. लेकिन धीरे-धीरे स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है.  बच्चे का दिमाग गेम में ही उलझा रहता है. इससे उनकी मेंटल हेल्थ वीक हो जाती है और इसके रिजल्ट्स के तौर पर बच्चे की मेमोरी लॉस तक हो सकती है.

ये हो रहा प्रभाव

डिसीजन पॉवर बच्चों का प्रभावित हो  रहा है. वह बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में फैसला करने लगे है.

ऐसे करें बचाव

इनका है कहना
गेमिंग का एडिक्शन बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए बहुत घातक है. इससे बच्चों का कंस्ट्रेशन बहुत कम होने लगता है.  मेमोरी लॉस जैसी परेशानियां भी हो सकती है. दिमाग के साथ ही आंखें भी इससे कमजोर होने लगती हैं.

डा. विभा नागर इंचार्ज, मनकक्ष

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