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Exclusive – घाटे से बचने के लिए किसी भी हाल में आईपीएल कराने पर तुला बीसीसीआई


Exclusive – घाटे से बचने के लिए किसी भी हाल में आईपीएल कराने पर तुला बीसीसीआई

अमित बिश्‍नोई

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के 13वें सत्र को वास्तविक स्वरूप देने के लिए हर संभव कोशिश करने में जुटा हुआ है. बीसीसीआइ ने प्रसारणकर्ता स्टार टीवी और विभिन्न प्रायोजकों से 2000 करोड़ रुपए की राशि एडवांस ले रखी है और वह नहीं चाहता कि भारत में बढ़ रहे कोविड-19 के मामलों को देखते हुए उसे यह गंवानी पड़े. दुनिया के सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के लिए आइपीएल पैसा कमाने का सबसे बड़ा जरिया है.

लगेगा 4 हजार करोड़ का झटका
आइपीएल 2020 का वास्तविक आयोजन 29 मार्च से होना था, लेकिन ऐसा अनुमान है कि बोर्ड अकेले मीडिया अधिकारों और स्पॉन्सरशिप से ही 4000 करोड़ रुपए की कमाई कर चुका है. इसमें मीडिया अधिकार धारक स्टार इंडिया से 3300 करोड़ रुपए, टाइटल स्पॉन्सर वीवो से 440 करोड़ रुपए और मैदानी प्रायोजकों, अंपायर और रणनीतिक टाइम-आउट भागीदारों के समूह से 170 करोड़ रुपए शामिल हैं. बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, ‘आइपीएल का आयोजन नहीं करने का मतलब है कि बोर्ड की रूपरेखा के लिए 4000 करोड़ रुपए का सीधा झटका. हमें पहले ही करीब 2000 करोड़ रुपए एडवांस में मिल चुके हैं. आइपीएल का आयोजन नहीं करने का मतलब यह होगा कि या तो हमें इसे वापस देना होगा या एक साल के लिए सभी अनुबंधों का विस्तार करना होगा. दोनों ही विकल्प बोर्ड के पक्ष में नहीं हैं.

करोड़ों का करार
लीग के टाइटल प्रायोजक वीवो ने पांच साल के लिए 2199 करोड़ रुपए में अधिकार हासिल किए थे. टाटा मोटर्स, एफबीबी और ड्रीम 11 सहित अन्य मैदानी प्रायोजकों के एक समूह को आइपीएल-13 के लिए 40 करोड़ रुपए का भुगतान करना था. अंपायर पार्टनर पेटीएम और रणनीतिक टाइम-आउट पार्टनर क्रमश: 28 करोड़ और 23 करोड़ रुपए का भुगतान करना था.

ब्राडकास्टर और फ्रेंचाइजी की चिंता
बीसीसीआइ ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जो आइपीएल को यूएई में कराने की अनुमति मांग रहा है और इसके लिए सितंबर-नवंबर की विंडो देख रहा है. इससे एक ओर जहां प्रशंसकों में खुशी है तो वहीं दूसरी ओर मीडिया अधिकार धारक स्टार इंडिया और टीम के मालिक अपने राजस्व को लेकर चिंतित हैं. एक फ्रेंचाइजी के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘बीसीसीआइ की भरपाई हो जाएगी, लेकिन लेकिन फ्रेंचाइजियों का क्या होगा? इस साल टीम प्रायोजकों पर कुल 500 करोड़ रुपए दांव पर हैं. यदि मैच खाली स्टेडियम में आयोजित किए जाते हैं, तो टीम के प्रायोजक अपने करारों पर फिर से बात करेंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और टीम के मालिक लीग के पक्ष में हैं.

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