नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों को ईडब्ल्यूएस फ्लैट आवंटन मामले ने तूल पकड़ लिया है। दिल्ली की आप सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश देने का आग्रह किया कि रोहिंग्या मुसलमानों को दिल्ली फ्लैट देने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया था। सिसोदिया ने कहा कि हमने रोहिंग्या मुस्लिमों को फ्लैट में स्थानांतरित करने का ना तो कोई फैसला लिया है और नहीं इस तरह का कोई आदेश दिया गया है। केंद्र ने भी कहा है कि उसने यह निर्णय नहीं लिया है। दोनों जब इस निर्णय के बारे में मना कर रहे हैं तो फिर यह फैसला किसने किया। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने मांग की है कि जिन्होंने भी यह फैसला लिया है। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
डिप्टी सीएम सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने गृहमंत्री से रोहिंग्या मुसलमानों को स्थानांतरित करने के मामले पर केंद्र को अपना रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया है। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया है कि रोहिंग्या समुदाय के सदस्यों को स्थानांतरित करने को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के ट्वीट के बाद आम आदमी पार्टी और अन्य ने जब विरोध किया तो गृह मंत्रालय ने इस पर सफाई दी थी। पुरी ने कहा था कि राजधानी में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बने फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाने की योजना है।
इस पर जब प्रतिक्रियाएं होने लगी तो चंद घंटों बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया गया है। दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि अवैध विदेशियों को जब तक उनके देश नहीं भेज दिया जाता तब तक उन्हें निरूद्ध केंद्रों में रखा जाए। मंत्रालय ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को नए स्थान पर बसाए जाने का प्रस्ताव दिया था। सिसोदिया ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस प्रकार के किसी भी दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में दिल्ली सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। इसी के साथ उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा की केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजधानी में रोहिंग्या शरणार्थियों को स्थायी आवास देने की कोशिश कर रही है।
