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हर बच्चा मुझे टाइगर जैसा ही लगता था – जैकी श्रॉफ

Jackie Shroff

भूत अंकल बनकर बच्चों साथ पक्की दोस्ती बना चुके बॉलिवुड के जग्गू दादा यानी जैकी श्रॉफ अब द ग्रेट ग्रैंड सुपर हीरो के किरदार में बच्चों की मासूम ख्वाहिशें पूरी करते हुए नजर आएंगे। परदे पर कभी रोमांस, कभी ऐक्शन तो कभी विलेन के किरदार को बखूबी निभाने वाले जैकी श्रॉफ को सुपर हीरो के अंदाज में देखना बच्चों के साथ बड़ों के लिए भी दिलचस्प हो सकता है। मनीष सैनी के निर्देशन में बनी फिल्म द ग्रेट ग्रैंड सुपर हीरो जो जल्द ही रिलीज होने वाली है, के प्रमोशन के लिए जैकी सोमवार को लखनऊ पहुंचे। इस मौके पर जैकी ने फिल्म से जुड़ी दिलचस्प बातें शेयर कीं। फिल्म के निर्देशक मनीष सैनी भी उनके साथ मौजूद थे।

बच्चों के लिए लक्षमण रेखा भी जरूरी है

फिल्म में बच्चों के साथ शूटिंग करने के सवाल पर जैकी कहते हैं कि बच्चों के साथ पहले पहले भी कई बार काम किया है। बहुत मजा आता है इन नन्हें मुन्नों के साथ काम करके। पहले जब टाइगर छोटा था तो मैं खुद को बाप ही समझता था लेकिन अब तो बच्चे बड़े हो गए हैं तो दादा जैसी फीलिंग तो आ ही गई है। सेट पर मुझे हर बच्चा टाइगर जैसा ही लगता था। जब वह छोटा था तो वैसी ही फीलिंग आती थी जैसी मुझे शूटिंग के सेट पर बच्चों के साथ काम करके आती है। जहां तक सवाल बच्चों को आजादी देने का है तो उन्हें खेलने कूदने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन उनके लिए भी एक लक्षमण रेखा बनानी ही पड़ती है। सही परवरिश का यही उसूल होना चाहिए। प्यार मोहब्बत के साथ अगर कहीं बच्चा गलती करता है तो सख्ती भी जरूरी है।

वहीं फिल्म की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म दो पीढ़ियों दादा और पोते के रिश्ते पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि पोता अपने सपनों में अपने दादा को सुपरहीरो के रूप में देखता है। इसी कल्पना को लेकर फिल्म में दादा का किरदार सुपरहीरो के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म बच्चों के लिए बेहद आकर्षक होगी, जिसमें एक्शन और हास्य का भरपूर मिश्रण है।

मैं अपना बचपन कभी नहीं भूलता हूं

ऐक्टिंग के करियर में बाइचांस ऊंचाइयां छूने वाले जैकी कहते हैं कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक्टर बनूंगा। ऐसे हालात ही नहीं थे। मुझे किसी ने फुटपाथ पर देखा था और मॉडलिंग करने का ऑफर दिया था। बस वहीं से एक्टिंग में आने का मौका दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि देवआनंद साहब और सुभाष घई जैसी महान हस्तियों ने जमीन से उठाकर एक सितारा बना दिया। लेकिन मैं आज भी अपनी जमीन से जुड़ा हुआ हूं। शायद इसलिए भी क्योंकि मैं अपने बचपन की जिंदगी हमेशा यााद रखता हूं। चाल में गुजारा वक्त शद रखता हू कभी नहीं भूलता और भूलना भी नहीं चाहिए। मैं हीरो बनने के बाद भी काफी वक्त वहीं रहा जहां तीन बाथरूम थे और 30 लोग थे। तब का दौर याद करके लगता है कि हम जमीन से जुड़े लोग हैं। वह देखकर लगता है कि प्यार मोहब्बत से जियो। गम बांटकर प्यार से रहो।’

बच्चों के जॉनर में अभी बहुत स्कोप है

इस दौरान डायरेक्टर मनीष सैनी से जब पूछा गया कि उन्हें बच्चों के साथ काम करना क्यों पसंद है? तो उन्होंने जवाब दिया, ‘यह ऐसा जॉनर है जो अभी बचा हुआ है। मेरी हमेशा कोशिश होती है कि ऐसी फिल्में क्यों न बनाएं, जिनसे बच्चों को सीखने को मिले। मां सरस्वती ने आशीर्वाद दिया है तो क्यों न हम ऐसी बातें बोलें जिससे बच्चे, नई पीढ़ी कुछ सीख सके। ऐसा समय है, जहां रील के दौर में हम जी रहे हैं। ऐसे में कोशिश है कि कुछ अच्छा करें। मैं फिल्में लिखते वक्त कोशिश करता हूं कि कहीं सिगरेट भी न डालूं। मैं नहीं चाहता कि वह भी कोई बच्चा देखे। बच्चा कोई बुरी चीज देखे। हमने जो चीज बना दी, उससे बच्चे सीख जाएं, एक पीढ़ी सीख जाए उससे बड़ी पूंजी कोई नहीं।’

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