भाला फेंक खिलाड़ी अनु रानी 23 जुलाई से शुरू हो टोक्यो ओलंपिक्स में हिस्सा लेने वाली देश की पहली जैवलिन थ्रोअर महिला बनने जा रही हैं। मेरठ की अन्नू रानी को वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर टोक्यो ओलंपिक का टिकट मिला है। कम लोग ही जानते हैं कि रिकॉर्ड बनाने के बावजूद भी वह ओलंपिक कोटा हासिल करने से चूक गई थी लेकिन अपनी उपलब्धियों के आधार पर वह इसमें शामिल होने में सफल रही।
1.17 मीटर की दूरी ने रोका कोटा
ओलंपिक एंट्री स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के तहत मात्र 1.17 मीटर की दूरी ने अनु रानी का ओलंपिक कोटा रोक दिया था बीते महीने पटियाला में हुए अंतिम ओलंपिक क्वालीफाइंग इवेंट इंटर स्टेट नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप मैं अनु ने नया मीट रिकॉर्ड बनाया था और 62 पॉइंट 83 मीटर की दूरी नापी थी बावजूद इसके स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पुराना होने की वजह से उनका कोटा रुक गया था।
बांस के भाले से करती थी अभ्यास
गांव से टोक्यो ओलंपिक तक का सफर अनु रानी के लिए आसान नहीं था शुरुआती दौर में भला ना होने की वजह से वह बांस से प्रैक्टिस करती थी। शुरुआती दौर में उनके ट्रेनर उनके पिता और बड़े भाई रहे। बहादुरपुर गांव की रहने वाली अनु रानी ने मेरठ में गुरुकुल प्रभात आश्रम से अपने खेल की शुरुआत की थी। 2009 में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई पहले चरण में डिस्कस थ्रो शॉट पुट और भाला फेंकने जैसे खेलों को चुना। बाद में भाले पर पकड़ मजबूत होती गई और इसी को अपना साथी बना लिया।

