बर्लिन। रूस से जर्मनी के तक जाने वाली प्राकृतिक गैस पाइपालइन में रिसाव की जानकारी सामने आने के बाद अब यूरोपीय संघ भड़क उठा है। यूरोपीय संघ ने इसको लेकर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी जारी की है। यूरोपीय संघ (ईयू) के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने कहा कि यह संदेह है कि पानी के नीचे बनी दो प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया हो। यूरोपीय संघ ने कहा कि इससे पहले तो आज तक ऐसा नहीं हुआ है। यह सब अब क्यों हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें रूस की कोई नई चाल लग रही है। ईयू के 27 सदस्य देशों की ओर से जारी बयान में बोरेल ने कहा कि सभी उपलब्ध जानकारी व सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि रिसाव जानबूझकर किए गए हैं। ये रूस के कृत्यों का परिणाम ही है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे में जानबूझकर कोई व्यवधान डालने की कोशिश पूरी तरह से अस्वीकार्य होगी। एकजुटता से रूस के इस घिनौने काम का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
दरअसल, भू-वैज्ञानिकों ने बताया था कि बाल्टिक सागर में विस्फोटों से पहले रूस से जर्मनी तक जाने वाली पानी के नीचे बनी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन में रिसाव हो गया है। डेनमार्क के एक अधिकारी ने बताया कि बाल्टिक सागर में ‘नॉर्ड स्ट्रीम’ गैस रिसाव की मात्रा डेनमार्क के कुल वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के एक तिहाई बराबर हो सकती है। यहां ऊर्जा एजेंसी ‘डेनिश एनर्जी एजेंसी’ के प्रमुख क्रिस्टोफर बोत्जाव ने बताया कि ‘नॉर्ड स्ट्रीम’ 1 और 2 पाइपलाइन पर तीन गैस रिसाव से होने वाला उत्सर्जन उनके देश के सालाना कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन के लगभग 32 प्रतिशत के समान है। 2020 में डेनमार्क का उत्सर्जन करीब 4.5 लाख टन सीओ2 था।
