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वोट बैंक का हिस्सा नहीं होने से पार्यावरण नहीं बन पा रहा चुनावी मुद्दा, आने वाले दिनों में गंभीर होगी समस्या


वोट बैंक का हिस्सा नहीं होने से पार्यावरण नहीं बन पा रहा चुनावी मुद्दा, आने वाले दिनों में गंभीर होगी समस्या

लखनऊ – Election Issues In India – कभी सड़क तो कभी बिजली को लेकर आए दिन चुनाव बहिष्कार की खबरे आती हैं लेकिन पार्यावरण को लेकर चुनाव में कोई बात नहीं हो रही है। जानकारों का कहना है कि इसको अब तक चुनावी मुद्दा बन जाना चाहिए। मौजूदा समय उप्र के 20 से ज्यादा शहरों में पार्यावरण की स्थिति खराब है। डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता कहते हैं कि इसको अब तक बड़े स्तर पर चुनाव का मुद्दा बनाना चाहिए। राजनीतिक दल अगर गंभीर नहीं है तो आम आदमी से लेकर सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि एक अनुमान के पार्यावरण दूषित होने से हर साल लखनऊ में समय से पहले 10 हजार लोगों की मौत हो रही है। सरकारें इसकी वास्तविक ऑडिट नहीं करा रही है। अगर इसपर अभी बात नहीं की गई तो आने वाले समय में समस्या और बड़ी होगी। खासकर लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, नोएडा जैसे शहरों की स्थिति बहुत खराब है। लखनऊ नगर निगम ही धुंध को खत्म करने वाली मशीने खरीद रहा है। लेकिन स्थायी हल क्या हो इसको लेकर कोई बात नहीं हो रही है।

उप्र के 40 जिलों का जल स्तर गिरा

मौजूदा समय उप्र के 75 में 40 जिलों का जल स्तर गिर गया है। लखनऊ में ही हर साल एक मीटर तक जल स्तर नीचे जा रहा है। अब तक जितने भी दलों ने चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है, उसमें इसको लेकर किसी भी संस्था ने कोई खास प्लानिंग नहीं की है।गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बांदा, बलिया, सोनभद्र समेत कई जिलों में आने वाला समय और खराब होने वाला है।

आम आदमी को आगे आना होगा

पर्यावरण के क्षेत्र में काफी लंबे समय से काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामेन्द्र सिंह बताते हैं कि पर्यावरण का मुद्दा किसी भी राजनीतिक पार्टियों के घोषणा पत्र में नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसको समाप्त किया जाए। इसको लेकर आम लोगों को आगे आना होगा। सब ने देखा है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन हमारे लिए कितना महत्पूर्ण रहा है। कई लोग पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण दुनिया में नहीं रहे।

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पूरे साल वायु प्रदूषण के बीच हम रहते हैं

मौजूदा समय स्थित यह है कि प्रदेश के ज्यादातर बड़े शहरों में पूरे साल वायु प्रदूषण मानक के हिसाब से नहीं होता है। हम वायु प्रदूषण की चपेट में रहते हैं। बरसात के वक्त जरूर थोड़ी राहत मिलती है। देश के 9 शहर प्रदूषण के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में शामिल हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि विश्व के शीर्ष 50 प्रदूषित शहरों में से 43 शहर तो भारत के हैं।

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