नए साल में आपका मनोरंजन मंहगा होने वाला है. यहाँ बात टेलीविज़न की हो रही है. जानकारी के मुताबिक फरवरी महीने के अंत तक टीवी बनाने वाली सभी कम्पनियाँ दाम बढ़ाने वाली हैं और ये इज़ाफ़ा कोई छोटा मोटा नहीं बल्कि 20 प्रतिशत तक हो सकता है, ये अलग बात है कि कुछ कम्पनियाँ एकमुश्त दाम बढाकर एक ही बार ज़ोर का झटका दे सकती हैं तो कुछ कम्पनियाँ ये काम किश्तों में कर सकती हैं यानी कई बार में दाम बढ़ा सकती हैं, दूसरे शब्दों में कहें तो ज़ोर का झटका धीरे से दे सकती हैं.तो अगर आपका भी टीवी खरीदने का प्लान हो तो थोड़ा जल्दी कीजिये वरना आपके पर्स से ज़्यादा पैसे खर्च हो सकते हैं.
टीवी के दाम बढ़ने की वजह इस लिए बताई जा रही है क्योंकि टीवी का पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले ओपन सेल की लागत बढ़ गयी है जिससे टीवी कंपनियों की लागत बढ़ गयी है और उसका असर मुनाफे पर पड़ रहा है, इसलिए दाम बढाकर टीवी कम्पनियाँ इस बोझ को थोड़ा कम करना चाहती हैं या यूँ कहिये कि इसका बोझ ग्राहकों पर डालना चाहती हैं. इसके अलावा टीवी के दाम बढ़ने की एक वजह और बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक टीवी कम्पनियाँ अपने प्रोडक्शन में कमी लाकर डिमांड एंड सप्लाई का फार्मूला अपनाने के बारे में भी सोच रही है. कंपनियों का मानना है कि सप्लाई को थोड़ा कम करके डिमांड को बढ़ाया जाय जिससे प्राइस बढ़ने से ग्राहक ज़्यादा भड़कें नहीं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक टीवी कंपनियों के पास काफी बड़ा स्टॉक डंप पड़ा है और इसीलिए वो प्रोडक्शन को कम करके अपना डंप स्टॉक बाजार में खपाने के बारे में भी सोच रही हैं. दरअसल टीवी उत्पादन में आने वाले कुल खर्च का लगभग 65 फीसद ओपन सेल पर चला जाता है. चूँकि चीन ही ओपन सेल का सबसे ज़्यादा उत्पादन करता है इसलिए सेल के दाम तय करने में उसी की चलती है जिसे टीवी कंपनियों को मजबूरन बर्दाश्त करना पड़ता है.
