नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलेंडर की तर्ज पर अब हर महीने बिजली की दरें भी बदलेंगी। विद्युत उत्पादन गृह में उपयोग होने वाले ईंधन जैसे कोयला, तेल और गैस की कीमतों के आधार पर ही अब बिजली दरें तय की जाएंगी। तय दरों के हिसाब से ही इसकी वसूली उपभोक्ताओं से होगी। इस नए प्रावधान के 2023 के शुरुआत से प्रभावी होने की पूरी संभावना है। बता दें कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 176 के तहत पहली बार 2005 में विनियम बनाए थे। अब इस विनियम में संशोधन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विद्युत संशोधन विनियम 2022 का मसौदा जारी किया गया है। दरअसल संसद के मानसून सत्र में विद्युत संशोधन विधेयक 2022 के पारित न होने के कारण सरकार ने विनियमों में संशोधन के जरिए इसके प्रावधानों को लागू करने की ओर कदम बढ़ाया है।
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय उप सचिव डी0 चट्टोपाध्याय की तरफ से गत 12 अगस्त को देश के सभी राज्य सरकारों सहित अन्य संबंधित इकाइयों को मसौदा भेज दिया गया है। इसके लिए आगामी 11 सितंबर तक सुझाव भी मांगे गए हैं। मसौदे के यह प्रावधान है कि वितरण कंपनी द्वारा बिजली खरीद की धनराशि समय से वसूली के लिए ईंधन की कीमतों के आधार पर ही हर महीने बिजली दरें तय की जाएं और उसी दर से वसूली उपभोक्ताओं से की जाएगी। बिजली कंपनियों की तरफ से नियामक आयोग में राजस्व आवश्यकता के साथ दाखिल किए जाने वाले ट्रू-अप प्रस्ताव में बढ़ी दरों का समायोजन होगा। इसके लिए विद्युत मंत्रालय ने फॉर्मूला तय किया है। आगामी 11 सितंबर के बाद विनियम को अंतिम रूप देकर इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही इसके 90 दिन बाद व्यवस्था लागू हो जाएगी।
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अभी जो व्यवस्था प्रभावी है उसके अनुसार विद्युत वितरण कंपनियां उत्पादकों के साथ 25-25 साल का विद्युत क्रय अनुबंध करती हैं। इसमें ईंधन की लागत बढ़ने पर वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। यह सब टेंडर की शर्तों में शामिल रहता है कि ईंधन की कीमत बढ़ने-घटने का आकलन करके उसके समायोजित कर वितरण कंपनियों को बेची जाने वाली बिजली की दरें इंगित की जाए।

