दिल्ली में जून की भीषण गर्मी के बीच बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लगा है। अब राजधानी में बिजली का बिल हर महीने बढ़ सकता है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) के नए आदेश के बाद बिजली वितरण कंपनियां अब हर महीने Power Purchase Adjustment Charge (PPAC) उपभोक्ताओं से वसूलेंगी। पहले यह चार्ज हर तीन महीने में लगाया जाता था।
DERC ने BRPL, BYPL और TPDDL को अप्रैल 2026 के लिए PPAC वसूलने की मंजूरी दे दी है। यह पहली बार है जब दिल्ली में मासिक आधार पर PPAC लागू किया गया है।
इस फैसले का असर अलग-अलग इलाकों में अलग होगा। टाटा पावर (TPDDL) के उपभोक्ताओं को करीब 1 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना होगा। वहीं, BSES के इलाकों में रहने वाले लोगों के बिजली बिल में 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
DERC ने BRPL के लिए 17.94 प्रतिशत, BYPL के लिए 17.43 प्रतिशत और TPDDL के लिए 16 प्रतिशत PPAC की मंजूरी दी है। बिजली खरीद की लागत, कोयले और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण यह अतिरिक्त चार्ज लगाया जाता है।
आयोग का कहना है कि इससे बिजली कंपनियों को बिजली उत्पादक कंपनियों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और उन पर वित्तीय दबाव नहीं बढ़ेगा।
हालांकि, दिल्ली सरकार की सब्सिडी लेने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। 200 से 500 यूनिट तक की सब्सिडी पाने वाले परिवारों के बिल पर इस बढ़ोतरी का अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सब्सिडी यूनिट के आधार पर दी जाती है, बिल की राशि के आधार पर नहीं।
वहीं, ज्यादा बिजली खर्च करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और गैर-सब्सिडी श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिल में अप्रैल 2026 के लिए 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज जुड़ सकता है।
DERC ने जुलाई 2026 से ‘कंपोनेंट एफ’ नाम का नया प्रावधान भी लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत पहले की किसी भी कम वसूली को बाद के महीनों में समायोजित किया जा सकेगा।
बिजली खरीद की बढ़ती लागत और ईंधन के दामों में वृद्धि के बीच अब दिल्लीवासियों को हर महीने बिजली बिल में बदलाव देखने को मिल सकता है।
