- पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को टालना नहीं चाहता चुनाव आयोग
नई दिल्ली। अगले साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। वहीं कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्राॅन का खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव आगे बढ़ाने की संभावनाएं बन रही हैं। इलाहबाद हाईकोर्ट भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव आगे बढ़ाने को लेकर चुनाव आयोग और पीएम से विचार करने को कह चुका है। लेकिन सूत्रों की माने तो चुनाव आयोग पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि चुनाव समय पर ही कराये जाएंगे लेकिन चुनावी रैलियों और सभाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
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अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। ओमीक्राॅन के बढ़ते खतरे को देखते हुए चुनाव समय पर कराए जाने की संभावना पर गौर करने के लिए आज चुनाव आयोग ने इन राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक की है। बैठक के दौरान चुनाव आयोग ने स्वास्थ्य सचिवों से उनके राज्यों में मिल रहे ओमीक्राॅन के केस और टीकाकरण के आंकड़े मांगे हैं। चुनावी राज्यों से यह भी पूछा गया है कि वह कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये केंद्र सरकार के साथ मिलकर किस प्रकार कार्य कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन रिपोर्टों के आधार पर ही जनवरी के पहले हफ्ते में चुनाव को लेकर निर्णय ले लिया जाएगा।
सूत्रों की माने तो चुनाव के टलने की संभावना बेहद कम हैं। क्योंकि विधानसभा चुनाव यदि आगे बढ़ाये गये तो जिन राज्यों में विधानसभा का का कार्यकाल पूरा हो चुका होगा वहां राष्ट्रपति शासन लागू करना होगा। वहीं चुनाव कराने की सारी तैयारियां भी नए सिरे से करनी होंगी। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव आयोग बड़ी रैलियों और जनसभाओं के आयोजन पर रोक लगा सकता है। इसकी बजाये राजनीतिक दलों को वर्चुअल और कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए डोर टू डोर कैंपेन की अनुमति दी जा सकती है।
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हाईकोर्ट ने यूपी चुनाव टालने पर विचार करने को कहा था
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बढ़ते जा रहे कोरोना संक्रमण को संज्ञान में लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और पीएम से अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को टालने पर विचार करने को कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जान है तो जहान है की बात कहते हुए राजनीतिक पार्टियों की चुनावी रैलियों पर रोक लगाने और टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार करने की बात भी कही थी।

