रंजीता सिन्हा
नई दिल्ली। मोदी और शाह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी जिस तरह अपने चाल-चरित्र-चिंतन की चिंता करते हुए कई सूबे के मुख्यमंत्रियों को बदल चुकी है, उससे लगता है कि उत्तर प्रदेश में संघ और संघठन कहीं न कहीं सीएम योगी को डिगा न सका। याद हो पिछले महीनों उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को हवा मिली थी। सरकार और संगठन दोनों की ही सक्रियता बढ़ी हुई थी। संघ के दिग्गज पदाधिकारियों का लखनऊ दौरा सिलसिलेवार हुआ। उन दिनों सह-सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दिल्ली से लखनऊ कई दफा आये-गये।
भाजपा व संघ हाईकमान इन दोनों सूत्रधारों ने बकायदा यूपी के मंत्रियों और विधायकों से योगी जी का फीड बैक लिया था। इन्हीं कवायदों के बीच बाद में योगी आदित्यनाथ अचानक दिल्ली पहुंचते हैं, और एकदम से मुख्यमंत्री-परिवर्तन का गुबार शांत हो जाता है। असल में उत्तर प्रदेश में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। हाईकमान इस बात को लेकर चिंतित था कि, कोरोनाकाल के चलते यूपी में योगी सरकार की छवि धूमिल पड़ी है, जनता ही नहीं जनप्रतिनिधियों के बीच भी नाराजगी होने की खबर थी। …पर यह खबरें हकीकत से परे रहीं और योगी का विकल्प नहीं मिला।
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बहरहाल, भाजपा हाईकमान ने बीते छह महीनों में चार मुख्यमंत्री बदल डाले हैं। ताजा प्रकरण में गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने शनिवार को अचानक अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। बीजेपी ने महज चौबीस घंटे के भीतर ही गुजरात मुखिया के तौर पर भूपेन्द्र पटेल के रूप में एक नया और अनुभवी चेहरा मिल गया।
माना गया कि बीजेपी ने रूपाणी सरकार के खिलाफ लोगों में बैठी नाराजगी की काट के लिए सीएम की सूरत बदल दी। याद कीजिए हाल ही में उत्तराखंड और कर्नाटक में भी भाजपा ने यही रणनीति अपनायी थी। रूपाणी से पूर्व कर्नाटक में जुलाई माह में तत्कालीन सीएम बीएस येदियुरप्पा को पद छोडऩा पड़ा था। बीएस येदियुरप्पा से पार्टी के तमाम लीडर खिन्न चल रहे थे। लिंगायत समुदाय के बड़े नेता और दक्षिण में पहली दफा कमल खिलाने वाले येदियुरप्पा का स्थान उनके ही नजदीकी लीडर बीएस बोम्मई को सौंपा गया है।
गौर हो कि, गुजरात और उत्तराखंड में अगले साल यानि 2022 में इलेक्शन होने जा रहा है। उत्तराखंड में भी त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ असंतुष्टि को लेकर तीरथ सिंह रावत को सीएम पद सौंपा गया था। पर, वह ज्यादा दिनों तक कुर्सी नहीं बचा सके। वर्तमान में वहां पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की कमान संभाल रहे हंै। उत्तराखंड के बीजेपी लीडरान ने हाईकमान से तीरथ के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। कई अनर्गल बयानों की वजह से वह मीडिया की खबरें बने रहे थे। अंतत: अपनी छवि खराब होते देख भाजपा ने उसे किनारा कर लिया।
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अब बात करें असम की तो वहां भी भाजपा ने हाल ही में नया मुखिया दिया है। असम में सर्बानंद सोनेवाल पूरे पांच वर्षों तक सीएम रहे और पार्टी यहां सत्ता-वापसी में भी कामयाब रही। इलेक्शन के बाद बीजेपी ने हिमंत बिस्व सरमा को सीएम पद सौंपा गया। सरमा ने नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी की नींव मजबूत की थी। कांग्रेस से आये सरमा पर भरोसा कर भाजपा ने कांग्रेस सहित दूसरी पार्टियों के उन नेताओं को यह संदेश दिया कि, हम दूसरे खेमे से आये लोगों को भी उचित सम्मान देते हैं।

