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Election Result 2022: पहले भी उठते रहे हैं ईवीएम पर सवाल, जनता का फैसला आज


Election Result 2022: पहले भी उठते रहे हैं ईवीएम पर सवाल, जनता का फैसला आज

रंजीता सिन्हा

लखनऊ। Election Result: ईवीएम (EVM) की सुरक्षा और सत्यता पर उठते सवालों के बीच गुरूवार शाम तक यूपी में गठित होने जा रही अगली सरकार की तस्वीर स्पष्ट होने लगेगी। खासकर सत्तासीन बीजेपी के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) को ईवीएम ‘थेफ्ट’ और ‘हैक’ यानि ‘फिजीकल’ चोरी और ‘हाईटेक’ चोरी दोनों की आशंका है। ऐसे प्रदेशभर के सभी मतगणना स्थलों के स्ट्रांगरूमों पर जहां समाजवादी पार्टी समर्थकों की पहरेदारी है वहीं पार्टी ने काउंटिंग सेंटर में जैमर लगाने की मांग भी की है। हालांकि, चुनाव आयोग (Election commission) और स्थानीय प्रशासन का दावा है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है और इसे चोरी या हैक नहीं किया जा सकेगा।

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असल में बीते कुछ सालों से चुनावों से पहले और परिणामों के बाद ईवीएम पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिणामों में पराजित होने वाला दल ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाता आया है। चूंकि यहां एक्जिट पोलों में बीजेपी की जीत के दावे किये जा रहे हैं, सो आशंकावश सपा का सवाल उठाना स्वाभाविक है।

याद हो मई 2010 में अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था और दावा किया था कि मोबाइल से संदेश भेजकर परिणामों को बदला जा सकता है। बाद में मई 2017 में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक एमएलए ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम से छेड़छाड़ किए जाने का डेमो दिया । हालांकि, आयोग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था और कहा था कि ये वो ईवीएम नहीं है, जिसका प्रयोग मतदान में होता है।

इन्हीं तरह के आरोपों का जवाब तलाशने के लिए ईवीएम हैकिंग और छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। चुनाव आयोग ने ये कमेटी बनाई थी। कमेटी ने मई 2019 में एक रिपोर्ट सार्वजनिक की। इस रिपोर्ट में ईवीएम की हैकिंग या छेड़छाड़ नहीं हो सकती, क्यों? इसके जवाब में दो तर्क रखे गए थे-

चुनाव आयोग जिन ईवीएम का प्रयोग करता है, वो स्टैंड अलोन मशीनें होती हैं। उसे न तो किसी कम्प्यूटर से नियंत्रित किया जाता है और न ही नेट या नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है। ऐसे में उसे हैक करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इसके इतना ही नहीं ईवीएम में जो सॉफ्टवेयर होता है, उसे रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय से जुड़ी सरकारी कंपनियों के इंजीनियर तैयार हैं। इस सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को किसी से भी शेयर नहीं किया जाता।

दूसरा जवाब यह है कि इंडिया में इस्तेमाल होने ईवीएम मशीन में दो यूनिट होती है। पहली कंट्रोलिंग यूनिट (सीयू) और दूसरी बैलेटिंग यूनिट (बीयू)। ये दोनों अलग-अलग यूनिट होती हैं और इन्हें चुनावों के दौरान अलग-अलग ही बांटा जाता है। अगर किसी भी एक यूनिट के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो मशीन वर्क नहीं करेगी। ऐसे में कमेटी का दावा था कि ईवीएम से छेड़छाड़ करना या हैक करने की गुंजाइश कतई नहीं है।

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मालूम हो कि हर ईवीएम का एक अलग सीरियल नंबर होता है। चुनाव आयोग एक ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर के मार्फत पता करता है कि कौन सी मशीन कहां है, ऐसे में उससे छेड़छाड़ करना असंभव है। रही बात इस मशीन में एक चिप लगी होने की तो चुनाव आयोग के मुताबिक, एक मतदाता एक बार में एक ही बटन दबा सकता है। एक बार बटन पुश के बाद मशीन बंद हो जाती है और फिर मतदाता चाहकर भी दूसरा बटन नहीं दबा सकता। नतीजतन चिप के जरिए भी छेड़छाड़ संभव नहीं।

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