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Election Commission वादों को रेगुलेट नहीं कर सकता, रेवड़ी कल्चर पर कांग्रेस का जवाब

Election Commission

पिछले कुछ समय से भाजपा और आम आदमी पार्टी में रेवड़ी कल्चर को लेकर घमासान मचा हुआ है, मामला सुप्रीम कोर्ट और इलेक्शन कमीशन तक पहुँच चूका है, इलेक्शन कमीशन से चुनावी वादों को रेगुलेट करने की मांग की जा रही है. मुफ्त की योजनाओं या रेवड़ी कल्चर पर अब कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है, कांग्रेस ने रेवड़ी कल्चर को बुरा ज़रूर बताया है लेकिन यह भी कहा है कि इसे कंट्रोल करने का चुनाव आयोग को कोई अधिकार नहीं है.

कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को मुफ्त की रेवड़ी वाले मामले में सुझाव देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ऐसा करने से बचना चाहिए. कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि इलेक्शन मेनिफेस्टो में अंकित चुनावी वादे किसी पार्टी की विचारधारा को दर्शाने का सबसे अच्छा तरीका होता है. दरअसल चुनाव आयोग ने अन्य पार्टियों की तरह कांग्रेस पार्टी से भी इस मुद्दे पर सुझाव माँगा था. पार्टी ने निर्वाचन आयोग को भेजे अपने जवाब में कहा है चुनावी वादे एक जीवंत लोकतंत्र का हिस्सा हैं. जयराम का मानना है कि चुनावी वादों से वोटर यह तय करने में सक्षम हो पाते हैं कि वो किसकों मतदान करें. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि अजीब तरह के वादे एक्सपायरी डेट्स के साथ आते हैं जो बहुत जल्दी एक्सपायर हो जाते है.

दरअसल मुफ्त चुनाव आयोग से रेवड़ी कल्चर पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने की मांग की गई थी. इस मांग पर निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस समेत सभी बड़े राजनीतिक दलों को एक चिट्ठी भेज मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में बदलाव के प्रस्ताव पर सुझाव मांगा था. ऐसे में निर्वाचन आयोग अगर इसे रेगुलेट करने का फैसला करता है तो चुनावी वादे करने वाली पार्टियों को अपने एलक्शन मेनिफेस्टो में अपने वादों पर एक वित्तीय खाका भी पेश करने के लिए कहा जा सकता है.

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