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बायर्न म्यूनिख छठवीं बार बना चैैंपियंस लीग का विजेता


बायर्न म्यूनिख छठवीं बार बना चैैंपियंस लीग का विजेता

लिस्बन। जर्मनी के फुटबॉल क्लब बायर्न म्यूनिख ने रविवार देर रात को यहां खेले गए यूएफा चैंपियंस लीग के फाइनल में फ्रांस के क्लब पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) को बेहद कड़े मुकाबले 1-0 से हराकर छठी बार यह खिताब अपने नाम किया. यह मैच फ्रांस और जर्मनी की चैंपियन टीमों के बीच खेला जा रहा था. पीएसजी फ्रांस की शीर्ष लीग-1 की चैंपियन है तो वहीं, म्यूनिख जर्मनी की शीर्ष लीग बुंडिशलीगा की विजेता है. लेकिन, जर्मनी की टीम ने पीएसजी के उसके पहली बार चैंपियंस लीग खिताब जीतने के सपने को तोड़ दिया. यह पहला चैंपियंस लीग फाइनल था जो दर्शकों के बिना खेला गया था.

पीएसजी को मिली निराशा
पीएसजी क्लब ने यहां तक पहुंचने के लिए करीब एक बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 75 अरब रुपये) का नौ साल में खिलाडिय़ों के ऊपर खर्चा किया था, लेकिन फिर भी टीम के हाथ ट्रॉफी नहीं लग पाई. इसके अलावा क्लब ने नेमार, कायलियन एमबापे और एंजेल डि मारिया जैसे स्टार खिलाडिय़ों पर 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 38 अरब रुपये) का निवेश किया, लेकिन वे तीनों ने भी फाइनल में निराश किया और टीम को खिताबी ट्रॉफी नहीं दिला सके.

रोने लगे नेमार
नेमार और एमबापे हार के बाद बेहद निराश थे, क्योंकि उन्हेंं आखिर तक इस परिणाम की उम्मीद नहीं थी. ये दोनों खिलाड़ी पीएसजी की बेंच पर बैठे थे. एमबापे के चेहरे पर मायूसी साफ दिख रही थी, जबकि नेमार अपने आंसू नहीं रोक पाए और उन्होंने अपना मुंह ढक दिया. पीएसजी का चैंपियंस लीग का अपना पहला खिताब जीतने का इंतजार एक साल और बढ़ गया, क्योंकि नेमार और एमबापे फाइनल में अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे. इन दोनों ने लचर प्रदर्शन किया.

लेवानदोवस्की ने उठाई ट्रॉफी
32 साल के स्ट्राइकर रॉबर्ट लेवानदोवस्की को फाइनल में गोल करने में सफलता नहीं मिली, लेकिन पोलैंड के इस अनुभवी फुटबॉल खिलाड़ी का चैंपियंस लीग ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा हो गया. म्यूनिख इससे पहले 2013 में चैंपियन बनी थी तब लेवानदोवस्की उप-विजेता बोरुसिया डोर्टमुंड टीम में थे. इस बार के फाइनल से पहले उनके टीम में रहते हुए म्यूनिख ने चार बार सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था.

रणनीति ने दिलाई जीत

पीएसजी 4-3-3 और म्यूनिख 4-2-3-1 की रणनीति के साथ मैदान पर उतरे थे. म्यूनिख के मैनेजर हैंस-डीटर फ्लिक का इवान पेरिसिक की जगह अंतिम एकादश में कोमान को शामिल करने का फैसला सही साबित हुआ. पेरिसिक ने लीग के इस सत्र में बार्सिलोना और चेल्सी के खिलाफ जीत में एक-एक गोल किया था. इसके अलावा उन्होंने फिलिप कॉटिन्हो को भी स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर मैच में खिलाने का फैसला किया.

पीएसजी समर्थकों ने मचाया उत्पात

पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) की हार के बाद उसके प्रशंसक पेरिस में भड़क गए और उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापायी करने के अलावा कारों और दुकानों की खिड़कियां तोड़ डालीं. इसके बाद पुलिस ने 148 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पेरिस पुलिस के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि सैकड़ों प्रशंसकों पर मास्क नहीं पहनने के लिए जुर्माना भी लगाया गया है. वहीं, लिस्बन के एस्टाडियो दा लूज स्टेडियम के बाहर कई समर्थक जमा हो गए और अपने क्लब म्यूनिख की जीत का जश्न मनाने लगे फिर स्थानीय पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया.

दूसरी बार पूरा किया ट्रेबल

बायर्न ने दूसरी बार ट्रेबल (दो घरेलू और चैंपियंस लीग जीतने वाली टीम) पूरा कर लिया है. फुटबॉल इतिहास में दूसरी बार ऐसा करने वाली बाॢसलोना के बाद बायर्न दूसरी टीम बन गई है. इससे पहले बायर्न ने भी 2012-13 में यह उपलब्धि हासिल की थी. बायर्न ने इस बार चैंपियंस लीग से पहले बुंडिशलीगा और जर्मन कप भी जीता है. एक सत्र में अगर कोई क्लब घरेलू लीग और कप के साथ चैंपियंस लीग का खिताब जीतने में कामयाब रहता है, तो इसे ट्रेबल कहते हैं.

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