नई दिल्ली: देश की पहली स्वदेशी mRNA वैक्सीन को मानव परीक्षण करने के लिए मंजूरी मिल गई है. पुणे की Gennova द्वारा विकसित mRNA वैक्सीन कैंडिडेट को ड्रग नियामकों से फेज 1/2 ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत करने की मंजूरी मिली है. डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है.
परंपरागत मॉडल का इस्तेमाल नहीं
mRNA वैक्सीन इम्यून रिस्पॉन्स का उत्पादन करने के लिए परंपरागत मॉडल का इस्तेमाल नहीं करती हैं. इसकी जगह वे शरीर में प्रोटीन बनाने के लिए वायरस के कृत्रिम RNA के जरिए मॉलिक्यूलर निर्देशों को रखते हैं. शरीर वायरस प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं जिसे इजाजत मिलती है और शरीर बीमारी के खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करती है.
महामारी से लड़ने के लिए बहुत अच्छा विकल्प
mRNA बेस्ड वैक्सीन वैज्ञानिक तौर पर महामारी से लड़ने के लिए बहुत अच्छा विकल्प हैं क्योंकि वह बहुत तेजी से विकसित होती हैं. mRNA वैक्सीन को गैर-संक्रामक होने की वजह से सुरक्षित माना जाता है. इन्हें बहुत अच्छे नतीजे देने वाला भी समझा जाता है. इसके अलावा mRNA वैक्सीन पूरी तरह से कृत्रिम होती है और उन्हें विकसित होने के लिए किसी होस्ट जैसे अंडे या बैक्टीरिया की जरूरत नहीं होती. इसलिए, इन्हें कम महंगे तरीके से मैन्युफेैक्चर किया जा सकता है. और बड़े स्तर पर टीकाकरण के लिए इनकी उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सकता है.

