नई दिल्ली: कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों को गलत बताने वाली रिपोर्टों को मोदी सरकार ने आधारहीन बताया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि एक अंतरराष्ट्रीय मैगजीन ने एक रिपोर्ट में ये अनुमान लगाया है कि भारत में कोरोना वायरस से हुई मौतों का आंकड़ा आधिकारिक आंकड़े से 5-7 गुना ज्यादा है. इस अनुमान के लिए जिस-जिस स्टडी को आधार बनाया गया है वह किसी देश या क्षेत्र की मृत्यू दर तय करने के लिए वैध टूल नहीं है.
मोदी सरकार का तर्क
सरकार ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मैगजीन की रिपोर्ट में जिस स्टडी को आधार बनाया गया है, माना जाता है कि वो वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लाफ़लर द्वारा की गई है. केंद्र ने बताया कि ” साइंटिफिक डेटाबेस जैसे पबमेड, रिसर्च गेट, आदि में जब रिसर्च स्टडीज की खोज की गई तो उसमें इस स्टडी के बारे में कुछ पता नहीं चला और ना ही पत्रिका में छपी रिपोर्ट ने इस स्टडी की विस्तृत कार्यप्रणाली दी है.”
गलत निकलते हैं सी-वोटर के अनुमान
वहीं तेलंगाना में बीमा दावों के आधार पर एक और स्टडी की गई थी. केंद्र ने कहा कि इस तरह के अध्ययन पर कोई सहकर्मी-समीक्षा वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है. केंद्र सरकार ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मैगजीन की रिपोर्ट में दो और रिपोर्टों को आधार बनाया गया है, प्रश्नम और सी-वोटर. केंद्र ने कहा, ये फर्म चुनाव नतीजों के प्रेडिक्शन और विश्लेषण में पारंगत हैं हालांकि कई बार इनका अनुमान गलत हो जाता है. ये फर्म कभी भी पब्लिक हेल्थ रिसर्च से नहीं जुड़े.
अंतर की बात भी स्वीकारी
केंद्र सरकार ने कहा, ये सच है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के दौरान और उसके बाद दर्ज की गई मृत्यु दर में अंतर हो सकता है, लेकिन इस तरह के अध्ययन संकट खत्म होने के बाद किए जाते हैं, जब विश्वसनीय सोर्स से मृत्यु दर के आंकड़े उपलब्ध होते हैं.
बिहार में सामने आया था हेराफेरी का मामला
अंतरराष्ट्रीय मैगजीन की ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई थी जब हाल ही में बिहार में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े का असली सच का खुलासा हुआ था. बिहार सरकार अब तक कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या को छिपा रही थी.

