उत्तराखंड में हो ‘आप’ का बहिष्कार : भावना पांडे

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उत्तराखंड में हो ‘आप’ का बहिष्कार : भावना पांडे

किसी भी हालत में अपने प्रदेश को शाहीनबाग नहीं बनने देंग

देहरादून। समाजसेवी और उद्यमी भावना पांडे ने आह्वान किया है कि उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी का जोरदार बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी उत्तराखंड की हितैषी किसी भी हालत में नहीं हो सकती।

भावना पांडे ने कहा कि हमने ये राज्य इतने संघर्ष के बाद बनाया है और हम अपने राजनीतिक हितों को साधने वाली पार्टी के हाथों इसे किसी भी हालत में नहीं सौंप सकते। उत्तराखंड बहुत संघर्षों और एक लंबी लड़ाई के बाद हमने हासिल किया है।

हम उस पार्टी के हाथों इस नहीं सौंप संकते जो दंगे भडक़ाने में शामिल रही हो और जिसके कर्ताधर्ताओं ने सिर्फ अपने स्वार्थ साधे हों। राज्य आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली भावना पांडे ने कहा कि आज आम आदमी पार्टी को लगता है कि उत्तराखंड की जनता विकल्प तलाश रही है तो उसने यहां का रुख कर लिया और अब उत्राखंडियत के नाम पर सडक़ों पर भी उतर रही है।

लेकिन वो अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होगी। भावना पांडे ने कहा कि जरा याद करिए अन्ना हजारे का वो आंदोलन जो उन्होंने जनलोकपाल के लए लड़ा था। अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने अपने गुरु अन्ना को ही धोखा देकर राजनीतिक दल बना लिया।

ऐसे स्वार्थियों और धोखेबाजों को हम उत्तराखंड को नहीं सौंप सकते। भावना पांडे ने कहा कि हम किसी भी हालत में अपने प्रदेश को शाहीनबाग नहीं बनने देंगे। पांडे ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी उत्तराखंड का इस्लामीकरण करने की साजिश रच रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये वही पार्टी है जिसके कारिंदों ने दिल्ली में दंगा भडक़ाकर उत्तराखंड के बेटे की जान ली।भावना पांडे ने कहा कि ये सच है कि उत्तराखंड की जनता विकल्प की तलाश कर रही है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमारे पास विकल्प नहीं हैं।

आखिर हम उस पार्टी और उसके ऐसे कर्ताधर्ताओं को पहाड़ कैसे सौंप दें जो पहाड़ से आजतक रूबरू नहीं हुए। आखिर आम आदमी पार्टी में उत्तराखंडियत नाम की कौन सी बात है। वो कभी भी पहाड़ के मुद्दों से न वाकिफ रही है और न ही वो पहाड़ के लिए कुछ कर सकती है।

आम आदमी पार्टी कई राज्यों में चुनाव लडक़र देख चुकी है। सभी जगह उसका हश्र बुरा हुआ है। दिल्ली के अलावा किसी भी राज्य में चाहे वो हरियाणा हो, गुजरात हो या अन्य राज्य। किसी भी राज्य के लोगों ने उसे नहीं स्वीकारा। उत्तराखंड के लोग भी उसको स्वीकारने के लिए कतई राजी नहीं हैं।

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