देश में आज 80 प्रतिशत से अधिक लोगों के पास अपना एक बैंक खाता है, फिर भी निम्न आय वर्ग के 70 फीसदी से अधिक लोग ऐसे हैं, जो अपनी बचत को जमा रखने के लिए या तो नकदी या चिट फंड जैसी अनौपचारिक व्यवस्था का लाभ उठाते हैं। देश के सबसे बड़े हाइपरलोकल फिनटेक स्टार्टअप पे नियरबाई की पहली ‘इंडिया सेविंग्स बिहेवियर’ रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
इस प्रवृत्ति के लिए प्रमुख कारणों में चिट फंड कंपनियों के साथ एक मजबूत सामाजिक अनुबंध भी है जो इस कोष में धन का पोषण करते हैं और साथ ही जागरूकता की कमी, तकनीकी बाधाएं और औपचारिक वित्तीय प्रणालियों की पहुंच संबंधी चुनौतियों का संयुक्त प्रभाव भी है। यह प्रवृत्ति शहरी आंतरिक और ग्रामीण भारत दोनों में देखी गई। पे नियरबाई द्वारा क्षेत्र में लोगों से विस्तृत इंटरैक्शन और डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से निम्न आय वर्ग के लगभग 10,000 लोगों के राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में ऐसे कई कारकों पर प्रकाश डाला गया है जो इस वर्ग के लोगों की बचत की आदतों को प्रभावित करते हैं।
जवाब देने वाले 47 प्रतिशत लोगों ने कहा कि फाइनेंशियल ऑफरिंग का चयन करते समय दो बातों ने निर्णायक भूमिका निभाई – अवधि को लेकर लचीलापन और बचत राशि पर कोई प्रतिबंध नहीं होना। लचीलेपन की आवश्यकता तब और उजागर हुई, जब 65 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि वे औपचारिक तंत्र के माध्यम से बचत करने से बचते हैं, क्योंकि उनके पास नियमित नकदी प्रवाह संभव नहीं होता। जब इस विषय पर और चर्चा की गई, तो उत्तरदाताओं ने खुलासा किया कि आय के प्रवाह में अनिश्चितता और बड़े घरेलू खर्च के कारण वे किसी भी निश्चित मूल्य के नियमित बचत उत्पाद के साथ नहीं जुड़ सकते।
इस वर्ग में वर्तमान को लेकर एक मजबूत पूर्वाग्रह देखा गया और भविष्य के रिटर्न की तुलना में लिक्विडिटी की वर्तमान जरूरतों को प्राथमिकता दी गई थी। 35 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि बचत करते समय उनका प्राथमिक उद्देश्य खुद को और घर को अनावश्यक खर्च करने से रोकना था। जब इस विषय पर आगे विचार किया गया, तो 65 फीसदी उत्तरदाताओं ने खुलासा किया कि वे अपने अतिरिक्त धन को जमा करना चाहते थे, ताकि वे एकमुश्त राशि एकत्र कर सकें और इस तरह अपने छोटे और मध्यम जीवन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद जुटा सकें। जहां तक छोटे और मध्यम अवधि के लक्ष्यों का सवाल है, तो अलग-अलग लोगों और आयु समूहों के बीच इन्हें लेकर काफी अंतर था। कोई अपने लिए बाइक खरीदना चाहता है तो कोई अपने बच्चे की शिक्षा के लिए धन जुटाने का लक्ष्य रखता है। आभूषण खरीदना, जमीन खरीदना या घर बनाना अन्य लोकप्रिय जीवन लक्ष्य थे। 49 फीसदी उत्तरदाताओं ने एक ऐसे सुरक्षा जाल के बारे में भी बात की, जो उन्हें आपात स्थिति से निपटने में मदद करेगा। महामारी ने लाखों लोगों को ऐसी अराजकता की तरफ धकेल दिया है, जो नियमित वेतन भुगतान के आसपास बढ़ती बेरोजगारी दर और असुरक्षा के कारण अपने वित्तीय कल्याण को प्रभावित करते हैं।
खास बात यह रही कि नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को सबने समझा है, ताकि वर्तमान कोविड-19 जैसी स्थिति का सामना किया जा सके और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अध्ययन में यह भी पता चला है कि निम्न आय वर्ग समूह ने अपने बचत उत्पाद का चयन करते समय निवेश पर प्रतिफल की बजाय लचीलापन, सुरक्षा, विश्वास और उपयोग में आसानी को प्राथमिकता दी। 40 फीसदी से अधिक लोगों ने कहा कि वे कागजी कार्यवाही और अन्य प्रक्रियाओं के कारण औपचारिक बचत उत्पाद को नहीं चुनते हैं। संरचित सेट-अप के प्रति विरक्ति, दस्तावेजों संबंधी बाधाओं, परिचालन में लगने वाला समय, प्रतीक्षा संबंधी समय आदि कारणों से भी लोग औपचारिक बचत उत्पाद से दूरी बनाए रखते हैं।

