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ऑनलाइन आर्डर पर मेरठ से सप्लाई होती थीं नशीली दवाएं


ऑनलाइन आर्डर पर मेरठ से सप्लाई होती थीं नशीली दवाएं

मेरठ। ऑनलाइन ट्रेडिंग के जमाने में नशीली दवाओं के कारोबारियों ने भी अपना काला कारोबार ऑनलाइन करना शुरू कर दिया है। इसका खुलासा हुआ मेरठ में नशीली दवाएं सप्लाई करने वाले गिरोह के पकड़े जाने के बाद। मेरठ के प्रमुख दवा मार्केट खैरनगर के दवा व्यापारियों का यह गिरोह ऑनलाइन आर्डर बुक करता था और नशीली दवाओ की कोरियर से सप्लाई करने के बाद पेमेंट ऑनलाइन लेता था। यह कारोबार कितना फैला था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक आरोपी के बैंक खाते में पुलिस को 93 लाख रुपये मिले हैं। वहीं लुधियाना पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई करते हुए करीब छह बैंक खाते फ्रीज करवाएं हैं। इस मामले की तह खुलने पर कई सफेदपोशों के नाम सामने आने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

मेरठ से नशीली दवाओं की सप्लाई के काले कारोबार पर मेरठ पुलिस की सर्विलांस सेल काफी समय से निगाह रखे हुई थी। एक सूचना के आधार पर सर्विलांस सेल ने दवा मार्केट खैरनगर के दवा व्यापारियों को दबोचा तो मामले का खुलासा होता चला गया। पकड़े गये आरोपी सादिक उर्फ बबलू निवासी भवानीनगर नौचंदी का खैरनगर में मेडिकल स्टोर है। पंजाब से नशीली दवाओं का आर्डर आने के बाद परतापुर के ग्राम काशी में मेडिकल स्टोर संचालक छुट्टन उर्फ सूर्य प्रकाश गोयल और खैरनगर में मेडिकल स्टोर कर्मचारी फरजान नशीली दवाओं का इंतजाम करते थे।

इसके बाद खैरनगर में फूड सप्लीमेंट बेचने वाला जान सैफी नशीली दवाओं के पैकेट बनाकर कोरियर के जरिये पंजाब सप्लाई कर देता था। सर्विलांस सेल के अनुसार एक पैकेट में 30 से 50 हजार तक गोलियां आ जाती थी। आरोपी जान सैफी के खाते से पुलिस को 93 लाख रुपये मिले हैं। वहीं जान सैफी के एक दोस्त के खाते में भी इस नशे के कारोबार से जुड़ी लाखों की रकम जमा बताई जा रही है।

वहीं लुधियाना पुलिस ने भी सूचना मिलने के बाद छह बैंक खातों को फ्रीज कराया है। पकड़े गये चारों आरोपियों से पूछताछ कर इस कारोबार का पर्दाफाश करने और इसमें शामिल और लोगों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। मेरठ पुलिस की सर्विलांस सेल के प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया की नशीली दवाइयों के धंधे से जुड़े सभी गिरफ्तार आरोपी नकली प्रोटीन कारोबार से भी जुड़े हुए हैं। मेरठ में नकली फूड सप्लीमेंट बनाकर पंजाब तक इसकी सप्लाई की जाती है। बाद में इन्होंने पंजाब के कारोबारियों से मिलकर नशीली प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई का धंधा शुरू कर दिया था।

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