नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने जैसे ही द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इसके बाद द्रौपदी मुर्मू देश की 15 वीं राष्ट्रपति बन गईं। मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। इसी के साथ ही देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाली और पहली आदिवासी महिला होने के साथ ही स्वतंत्र भारत में पैदा हुई वो देश की पहली राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्होंने ओडिशा के गांव से अपनी जीवन यात्रा शुरू की। राष्ट्रपति पद उनकी उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के गरीबों की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति से वो यहां तक पहुंची हैं। वो अपने को गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। उनके लिए जनता का हित ही आज सर्वोपरि है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वो चाहती हैं कि सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों तथा वो देश के हर क्षेत्र में अपना बेहतरीन योगदान देकर आगे बढ़तीं रहें। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जगत कल्याण की भावना के साथ वो सबके विश्वास पर खरा उतरने के लिए निष्ठा व लगन से काम करने को सदैव तत्पर रहेंगी। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि उनका जन्म उस जनजातीय परंपरा में हुआ। जिसने हजारों वर्षों से प्रकृति के साथ ताल-मेल कर जीवन को आगे बढ़ाया। उन्होंने जंगल और जलाशयों के महत्व को जीवन में महसूस किया। हम प्रकृति से जरूरी संसाधन लेते हैं और श्रद्धा से प्रकृति की सेवा भी करते हैं। उन्होंने अपने अब तक के जीवन में जन-सेवा में जीवन की सार्थकता को अनुभव किया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मैं देश के युवाओं से कहना चाहती हूं कि आप न केवल अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव रख रहे हैं। देश के राष्ट्रपति के तौर पर उनका हमेशा युवाओं को पूरा सहयोग रहेगा।

