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कोरोना को लेकर मन में न पालें खौफ, एहतियात बरत कर रहें सुरक्षित


कोरोना को लेकर मन में न पालें खौफ, एहतियात बरत कर रहें सुरक्षित

तीन माह से घर छोड़ कर काविड-19 वार्ड में मरीजों की सेवा में लगे हैं कोरोना योद्धा प्रदीप भोला

 मेरठ। कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिये स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक से लेकर वार्ड व्बाय तक कोविड-19 वार्ड से अपनी डयूटी हटवाने के प्रयास में जुटे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग में कुछ ऐसे भी समर्पित अधिकारी-कर्मचारी भी हैं जो वहां ड्यूटी देना अपना फर्ज समझ रहे हैं। इन्हीं अधिकारियों में से एक हैं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी  प्रदीप भोला। पिछले तीन महीनों से कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच रहकर उनकी सेवा कर रहे प्रदीप का कहना है कि एहतियात बरत कर कोरोना संक्रमण से बचें, इसको लेकर मन में कोई खौफ न पालें।
प्रदीप भोला रोहटा के अंतर्गत आने वाले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात हैं। उन्होंने स्वयं अधिकारियों से कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी लगाने की प्रार्थना की, जिस पर उन्हें पांचली स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोविड लेवल -1 अस्पताल में ड्यूटी पर लगा दिया गया। उन्होंने वहां करीब एक सप्ताह डयूटी की। वहां पर कोरोना संक्रमित मरीजों को उन्होंने जमकर मोटिवेट किया और उनकी सेवा की। यहां बड़ी संख्या में शुगर, ब्लड प्रेशर ,सांस के मरीज थे। ड्यूटी के प्रति समर्पण देखते हुए उन्हें कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिये बनाये गये नये केन्द्र श्री राम इंस्टीट्यूट में भेजा गया। अब वह वहीं ड्यूटी कर रहे हैं।

प्रदीप भोला

 जिदंगी में ऐसे लम्हे कभी-कभी आते हैं
 प्रदीप ने बताया वह इससे पहले सहारनपुर मेडिकल कालेज में कार्यरत थे। उन्हें मरीजों की सेवा करने में काफी आंनद मिलता है। ढाई साल पहले उन्होंने रोहटा ब्लॉक में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में कार्य भार ग्रहण किया। उन्होंने बताया कोविड- 19 में संक्रमित मरीजों की सेवा करने की ललक उनके मन थी। जिंदगी में ऐसे लम्हे कभी-कभी आते हैं। प्रदीप का कहना है कि कोरोना इतनी ज्यादा खतरनाक बीमारी नहीं है, जितना इसका लोगों के मन में खौफ है। विश्व भर में कोरोना से हो रही मौत का सदमा संक्रमित मरीजों में काफी गहरा प्रभाव डाल रहा है। इसी बात को कोरोना संक्रमित मरीजों के दिलों से निकालना उनका मकसद है। उन्होंने कहा इस समय कोरोना के मरीजों के अंदर बैठे भय को दूर करना सबसे बड़ी सेवा है।
ढाई साल की बच्ची से फोन पर करते हैं बात

   मार्च से (होली के बाद) प्रदीप अपने घर पर नहीं गये हैं। फोन पर ही अपनी बच्ची और पत्नी से बात कर लेते हैं। उनकी पत्नी पिंकी भी देवबंद से नर्सिग का कोर्स कर रही हैं। उनकी ढाई साल की एक बेटी आराध्या है। उन्होंने बताया कई बार ऐसे पल आये जब नन्हीं सी बेटी ऐसे इशारे कर रही थी जैसे वह उन्हें घर पर बुला रही हो।

  कोरोना को लेकर मन में खौफ न पालें

सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी  ने लोगों से अपील की है कि कोरोना का वहम अपने मन में न पालें।  मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग व नियमों का पालन करने से कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। अपने आसपास के लोगों को प्रेरित करें कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। सावधानी बरतकर इससे बचा जा सकता है। 

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