नई दिल्ली। गोल्ड लोन (Gold Loan) वाली गैर-बैंकिंग कंपनियों की जमा पूंजी वित्तीय वर्ष 2021—22 में 20 प्रतिशत तक बढ़ गई। वहीं अब इस नए वित्तीय वर्ष में यह 1.3 लाख करोड़ रुपये तक जा सकती है। क्रिसिल रेटिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक तेजी और त्योहारी सीजन के शुरुआत के साथ छोटे व्यापारियों और आम लोगों के बीच गोल्ड लोन की मांग बढ़ती जा रही है। जिससे लोग इन लोन को लेकर व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है गोल्ड लोन में आ रही तेजी एनबीएफसी के लिए कही मुसीबत ना बन जाए। संभावना जताई है कि जिस तेजी से गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है उसी तेजी से डिफॉल्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहली तिमाही के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद चालू वित्त वर्ष 2021—22 के दूसरी तिमाही में गोल्ड लोन लेने में काफी तेजी आई थी।
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कई राज्यों में लॉकडाउन में ढील देने के बाद गोल्ड लोन लेने के मामले बढ़े। लेकिन वहीं यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त वर्ष 2021—22 की शेष अवधि में यह गति बनी रही। इस वित्त वर्ष के शुरूआती दौर में गोल्ड लोन मांग में है। जबकि कर्जदाता कई अन्य परिसंपत्ति श्रेणियों में वृद्धि को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। साख के नजरिये से गोल्ड लोन एक अत्यधिक सुरक्षित और नकदी श्रेणी की परिसंपत्ति है। इसमें लोन के नुकसान के साथ बेहतर रिटर्न भी मिलते हैं।

