मोदी से बैर नहीं, नीतीश की खैर नहीं

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मोदी से बैर नहीं, नीतीश की खैर नहीं

  • लोजपा हुई नीतीश कुमार से अलग, लेेकिन भाजपा को समर्थन जारी
  • बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के दोनों हाथों में हैं लड्डू

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। बिहार चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी ने भले ही एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया हो। लेकिन लोजपा की नाराजगी सिर्फ जनता दल यूनाईटेड से दिखाई दे रही है। लोजपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह बिहार विधानसभा चुनाव जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ने को तैयार नहीं है।

लेकिन वह चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद भी भाजपा को समर्थन जारी रखेगी। यानी स्पष्ट है कि यदि लोजपा को अवसर मिला तो वह चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा से गठबंधन कर सरकार बनाने से भी नहीं हिचकेगी। ऐसे में भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू दिखाई दे रहे हैं। यदि एनडीए जीता तो भाजपा का फायदा और यदि जदयू की सीटें कम रह गयीं तो लोजपा उसके साथ आने को तैयार है ही। ऐसे में बिहार की सत्ता में भाजपा का पलड़ा भारी रहना तय है।

बिहार विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। नाराजगी, आरोप-प्रत्यारोप, मान-मनौव्वल के लंबे दौर के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी की राह एनडीए से अलग हो चुकी है। लोजपा ने पहली बार चुनावी रणभूमि में अपने बलबूूते 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। लेकिन दुश्मन का दोस्त भी दुश्मन होता है कि नीति से विपरित लोजपा, एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड को तो विपक्षी पार्टी मान चुकी है मगर जदयू की दोस्त यानी गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी से दोस्ती निभाने और दर्शाने में लोजपा परहेज नहीं कर रही है। लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने साफ तौर पर कहा है कि वे जदयू से अलग हुए हैं, भाजपा से नहीं।

एनडीए में मनचाही संख्या में सीट न मिलने से नाराज लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय दल की बैठक रविवार को दिल्ली में हुई। बैठक में तय किया गया कि बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा, जदयू से अलग होकर चुनाव लड़ेगी। बैठक के बाद लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि भाजपा के साथ कुछ सीटों पर लोजपा की फ्रेंडली फाइट होगी। लेकिन पार्टी उन सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार जरूर उतारेगी, जहां जदयू के प्रत्याशी होंगे। चिराग पासवान ने कहा है कि लोजपा चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को मजबूत करने का काम करते रहेंगे। जाहिर है कि लोजपा की नाराजगी जदयू प्रमुख नीतीश कुमार से है मगर वह भाजपा को समर्थन देना जारी रखेगी। अगर चुनाव बाद जरूरत हुई तो लोजपा और भाजपा मिलकर बिहार में सरकार बना सकती हैं।

लोजपा के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने भी एक बयान में कहा है कि लोकसभा में हमारा भाजपा के साथ मजबूत गठबंधन है। लेकिन लोजपा और भाजपा में कोई कटुता नहीं है। चुनाव नतीजे आने के बाद लोजपा के जीते हुए विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रहकर भाजपा-लोजपा सरकार बनाएंगे। लोजपा का हर विधायक भाजपा के नेतृत्व में बिहार को फस्र्ट बनाने का काम करेगा।

भाजपा को मिल रहा टकराव का फायदा
बिहार चुनाव में जदयू और लोजपा के टकराव का सबसे बड़ा फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है। एक ओर जहां लोजपा ने चुनावी मैदान में भाजपा उम्मीदवार की खिलाफत न करने का निर्णय लिया है वहीं दूसरी ओर भाजपा, जदयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में साफ है कि यदि एनडीए को सफलता मिली तो भाजपा-जदयू गठबंधन को सत्ता सुख भोगने का अवसर मिलेगा। लेकिन यदि जदयू को आशातीत सफलता नहीं मिली यानी उसको अपेक्षित सीटें नहीं मिल पायीं तो चुनाव से पहले से उसका समर्थन करने वाली लोजपा उसे चुनाव के बाद भी समर्थन देना जारी रखेगी। कहा यह भी जा रहा है कि जिन सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवार उतारेगी वहां पर लोजपा अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करेगी।

यदि ऐसा हुआ तो यह चर्चाएं सत्य ही साबित होती दिखेंगी जिनके अनुसार भाजपा और लोजपा में गुपचुप तौर पर आपसी सहमति बन गयी है। ऐसे में लोजपा के निशाने पर सिर्फ जदयू और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ही होंगे और भाजपा के दोनों हाथों में होगा चुनावी लड्डू। अब वह लड्डू जदयू का होगा या लोजपा का यह तो चुनाव के परिणाम ही बतायेंगे लेकिन यह तय है कि बिहार चुनाव में भाजपा का मुंह मीठा होकर रहेगा।

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