अल्मोड़ा। विश्व के सबसे बड़े श्री यंत्र मंदिर के दर्शन करने हैं तो चले आइए उत्तराखंड के ढोल आश्रम। शहर की भीड़भाड़ और दौड़ भाग भरी जिंदगी से दूर पूछे नीचे पहाड़ी रास्तों से होते हुए घने जंगलों के बीच जब हम डोल आश्रम पहुंचते हैं तो रास्ते की सारी थकान यंहा के प्राकर्तिक नजारे को देख दूर हो जाती हो जाती है। अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा ब्लॉक में बना यह आश्रम प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की एक बड़ी मिसाल है। श्री कल्याणिका हिमालयन देवस्थानम न्यास कनरा-डोल के नाम से जानी जाने वाला यह आश्रम प्राकृतिक सौंदर्य और सनातन सभ्यता का एक अनूठा संगम है। महंत बाबा कल्याणदास महाराज की कठोर तपस्या,मेहनत और लगन का परिणाम यह आश्रम अब दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र मंदिर के रूप में भी जाना जता है। यह आश्रम एक मठ ही नही अपितु आध्यत्मिकता और साधना का महत्वपूर्ण केंद्र है।
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विश्व का सबसे बड़ा श्रीयंत्र
डोल आश्रम विश्व के सबसे बड़े और भारी श्रीयंत्र के तौर पर भी जाना जाता है। यंहा पर 126 फुट ऊंचे ओर 150 मीटर व्यास के श्रीपीठम का निर्माण किया गया है। 2012 में में इसके निर्माण शुरू किया गया था जो 2018 में पूरा हुआ। बताते है कि इस श्रीपीठम में अष्ठ धातु से बने 150 किलो वजन का साढ़े तीन फुट ऊंचे श्रीयंत्र की स्थापना की गई है। डोल आश्रम का यह मुख्य आकर्षण का केंद्र है। वेदिक ओर आध्यत्मिक आस्था को एक साथलाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस श्रीपीठम मे करीब 50प लोग एक साथ ध्यान लगा सकते है।
उत्तराखंड का पांचवा धाम है डोल आश्रम
अल्मोड़ा से पिथौरागठ रोड से हिट हुए आप डोल आश्रम पहुंच सकते है। अपनी अभूतपूर्व सुंदरता को समेटे डोल गांव के नाम पर ही इस आश्रम को डोल आश्रम के नाम से जाना जाता है। इस आश्रम में धोती पहनकर ही जाना होता है। घंटे जंगल के बीच इस आश्रम में बच्चो को निःशुल्क संस्कृत की शिक्षा दी जाती है। आश्रम में 12 वी क्लास तक के संस्कृत विद्यालय को पब्लिक स्कूल में बदलने की कवायद चल रही है। इसके अलावा भंडारा व अन्य सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया जाता है। उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल के के पॉल इस आश्रम को पांचवे धाम के रूप में संबोधित कर चुके है।
