व्यतिपात योग की ऐसी महिमा बताई है कि इस समय जप पाठ प्राणायम, माला जप या मानसिक जप करने से भगवान विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की कृपा होती है। जप करने वालों को व्यतिपात योग में जो कुछ किया है उसका कई गुना लाभ मिलता है। इस योग में किया पूजा पाठ से मानसिक शांति के साथ ही बाधाएं दूर होती है। व्यतिपात योग का मतलब कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी। जिस कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए। उन्होंने चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना किया।
इससे सूर्य देव को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नहीं दिया। सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा चाहिए। इसको इतना नहीं भूलना चाहिए। सूर्यदेव को गुरुदेव की बात याद आई और आँखों से आँसु निकल आए। यही समय व्यतिपात योग कहलाता है। इस योग में किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की महिमा बताई गई है।
