शनिवार से पंच पर्वों की शुरूआत हो रही है। पहला पर्व धनतेरस शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन से दीपावली तक अगर विधिविधान से बताए गए तरीकों से पूजा की जाए तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होगी और धनवर्षा भी खूब होगी। धनतेरस की शाम को निर्धनता दूर करने के लिए अपने पूजाघर में अखंड दीपक जलाना चाहिए। यह दीपक दीपावली की रात तक जरूर जलता रहे। अगर दीपक भैयादूज तक अखंड जलता रहे तो घर के सारे वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं। घर के ईशान कोण में गाय घी का दीपक जलाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें दिए में थोड़ा केसर जरूर डालें।
घर में तेल का दीपक प्रज्वलित करें तथा उसमें दो काली गुंजा डाल दें। गन्धादि से पूजन कर अपने घर के मुख्य द्वार पर अन्न ढ़ेरी पर इसको रख दें। साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। स्मरण रहे दीप रातभर जलते रहना चाहिये। बुझना नहीं चाहिये। दीपावली के दिन दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र,धूप , अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र इत्यादी से पूजन करना चाहिए। साधक गुरुदेव व लक्ष्मीजी के फोटो रखें तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख को रखें। उस पर केसर से सतिया बनाएं। इसके बाद कुमकुम से तिलक कर दें। बाद में स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की सात मालाएँ करें। ”ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृहे स्थिरो ह्रीं ॐ नमः”। तीन दिन तक ऐसा करने योग्य है। इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है। मंत्रजाप पूरा होने के बाद लाल वस्त्र में शंख को बांधकर घर में रख दें। कहते हैं कि जब तक वह शंख घर में रहेगा। तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी।

