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Garuda Purana: भूलकर भी न करें मृत व्यक्ति की इन चीजों का इस्तेमाल

woman hand behind the matte glass

सनातन धर्म में पुनर्जन्म का विधान है। इसकी संपूर्ण जानकारी धार्मिक ग्रंथ ‘गरुड़ पुराण’ में निहित है। ‘गरुड़ पुराण’ में बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा कहां जाती है, क्या करती है और कब अवतार लेती है? इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है. हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘गीता’ में भगवान श्रीकृष्ण भी कहते हैं- आत्मा न कभी मरती है और न कभी जन्म लेती है। आत्मा एक निश्चित समय के बाद शरीर बदल लेती है। कर्मों का लेखा-जोखा आत्मा के साथ चलता है। व्यक्ति का भाग्य उसके कर्मों के अनुसार लिखा होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति को अगला जन्म उसके जीवन में किए गए कर्मों के आधार पर मिलता है। सरल शब्दों में कहें तो व्यक्ति को अगला जन्म उसके कर्मों के अनुसार मिलता है।

वहीं, मृत्यु के बाद तेरहवें दिन तक आत्मा धरती (घर) पर ही रहती है। इस दौरान मृतक की आत्मा की शांति के लिए भोजन कराया जाता है। यह भोजन मृतक की आत्मा को यमलोक तक यात्रा करने की शक्ति देता है। अंतिम दिन पिंडदान किया जाता है। इसके बाद मृतक की आत्मा मोह माया को छोड़कर यमलोक की ओर चली जाती है। सनातन धर्म में मृत व्यक्ति से जुड़ी चीजें दान की जाती हैं। हालांकि, लोग घर में महंगी चीजें रखते हैं। अनजाने में लोग इन चीजों का इस्तेमाल भी करने लगते हैं। शास्त्रों के अनुसार किसी मृत व्यक्ति की चीजों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं है. इससे जीवन में कई परेशानियां आती हैं। आइये जानते हैं इसके बारे में सबकुछ-

इन चीजों का प्रयोग न करें

-शास्त्रों में निहित है कि मृत व्यक्ति को अपने वस्त्रों से अधिक लगाव होता है। शरीर छोड़ने के बाद भी मृतक की आत्मा मोह में बंधी रहती है। इसके लिए मृत व्यक्ति के कपड़ों का उपयोग न करें। अगर घर में मृत व्यक्ति के कपड़े हैं तो उन्हें किसी जरूरतमंद को दान कर दें। इससे मृतक की आत्मा को मोक्ष मिलता है।

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