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Diwali 2020: जाने और पढ़े दिवाली की 4 पौराणिक कथाएं


Diwali 2020: जाने और पढ़े दिवाली की 4 पौराणिक कथाएं

दिवाली मनाने के पीछे सिर्फ एक ही कारण नहीं है, पुराणों में इससे जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं। चूंकि हमने बचपन में किताबों में अधिकतर राम जी के लौटने वाली कथा को ही पढ़ा है और घर में भी बड़ों ने हमें यही बताया है इसलिए राम जी के अयोध्या लौटने वाली कथा को हमने दिवाली मनाने की मुख्य वजह मान लिया है। पर वास्तव में दिवाली से जुड़ी और भी कई सारी कथाएं हैं जिनमें दैवीय शक्तियों ने अपने साहस और बल से दुष्ट शक्तियों का संहार किया है। चूंकि दिवाली के दिन कई सारे संयोग ऐसे बनते हैं, जो विश्वास दिलाते हैं कि अंधकार के बाद उजियारा होता ही है इसलिए इसे दीपोत्सव के रुप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं, दिवाली से जुड़ी 4 अन्य कथाएं-

केसर सागर से प्रकट हुई थीं देवी लक्ष्मी

दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी का पूजन इसलिए किया जाता है क्योंकि इसी दिन उनका प्रकटोत्सव होता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन देवी लक्ष्मी केसर सागर से प्रकट हुई थीं। साथ ही कुबेर एवं आरोग्य के देवता धनवंतरि भी इसी दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। इसलिए माता लक्ष्मी की पूजा के साथ ही इनका भी पूजन किया जाता है।

कृष्ण ने किया नरकासुर वध


कार्तिक मास की चतुर्दशी को श्री कृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। इसी कारण दिवाली के एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। जिसे भारत के कई क्षेत्रों में बड़ी दिवाली भी कहते हैं। जब नरकासुर वध का समाचार गोकुलवासियों को मिला तो उन्होंने अगले दिन घी के दिये जलाकर खुशियां मनाई और ईश्वर को धन्यवाद दिया।

हिरण्यकश्यप का वध


विष्णु पुराण के अनुसार, दिपावली के दिन ही भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण करके असुर हिरण्यकश्यप का वध किया था। हिरण्यकश्यप ने बह्माजी की कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया था इसलिए उसका संहार करना इतना आसान नहीं था। नरसिंह अवतार में वे सभी गुण थे, जो हिरण्कायकश्यप का वध कर सके। इस दिन प्रजा ने घर में घी के दिपक जलाए थे।

पांडवों ने किया था अज्ञातवास पूरा


जब चौसर में पांडव, कौरवों से हार गये थे तो उन्हें बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास मिला था। तेरह वर्ष का कठिन समय व्यतीत करके जिस दिन पांडव वापिस राज्य लौटे थे, उस दिन दिवाली का दिन था। उनके लौटने की खुशी में प्रजावासियों ने दिये जलाकर उनका स्वागत किया था।

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