ब्लैक फंगस से पीड़ित बहन का मेडिकल में इलाज न होने पर ले गया घर
मुनीश कुमार
मेरठ। 4 दिन हो गये बहन को मेडिकल काॅलेज में भर्ती कराये हुए। ब्लैक फंगस होने के बावजूद न तो मेरी बहन को कोई दवा दी गयी और न ही कोई इंजेक्शन लगाया गया है। मैं तो अपनी बहन को वापस ले जा रहा हूं, मरना होगा तो घर में ही मरेगी।
यह पीड़ा है एलएलआरएम मेडिकल काॅलेज से निराश हुए एक भाई की जिसने बड़ी उम्मीद के साथ अपनी बहन को मेडिकल में भर्ती कराया था। लेकिन यहां उसकी बहन को ब्लैक फंगस का उपचार नहीं दिया गया तो वह नाउम्मीद होकर बहन को घर ले गया।

मोदीपुरम निवासी सोनू का आरोप है कि उसकी बहन इंद्रा को ब्लैक फंगस बीमारी होने के बाद मेडिकल में भर्ती कराया था। चार दिन से बहन इंद्रा मेडिकल में रही मगर न तो उसे कोई दवा दी गयी और न ही कोई इंजेक्शन लगाया गया। निराश भाई सोनू का कहना था कि मेडिकल में इलाज हो नहीं रहा और उसके पास इतने पैसे नहीं है कि प्राइवेट में अपनी बहन का इलाज करा सके। इसलिये बहन को घर ले जा रहा हूं, मरना होगा तो घर पर ही मरेगी।
सीएम ने किया महामारी घोषित, इलाज हो नहीं रहा
एक ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर इसका समुचित उपचार करने के आदेश दिये हुए हैं। वहीं मेडिकल काॅलेज प्रबंधन भी ब्लैक फंगस के मरीजों का उपयुक्त उपचार करने का दावा करता है। मेडिकल प्रबंधन के अनुसार एक भी ऐसा मरीज नहीं है जिसे इलाज न मिल पा रहा हो। लेकिन सोनू की निराशा और उसकी बहन इंद्रा का उपचार न मिलने के कारण वापस लौटना मेडिकल काॅलेज प्रबंधन के दावों को झूठा साबित कर रहा है। सोनू और इंद्रा की तरह अनेक निराश मरीजों के लिये मेडिकल में दिये जा रहे उपचार के कोई मायने नहीं है।

