दोहे के सहारे Digvijay Singh ने खुद को बताया राजाओं का राजा

पॉलिटिक्सदोहे के सहारे Digvijay Singh ने खुद को बताया राजाओं का राजा

Date:

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की तारिख ख़त्म हो गयी, दिग्विजय सिंह ने परचा खरीदने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए या फिर कह सकते हैं कि गाँधी फैमिली के लिए अपने कदम वापस खींच लिए. उम्मीदवार से खड़गे के प्रस्तावक बन गए मगर दिल में कहीं न कहीं कसक तो रह ही गयी होगी कि गाँधी फैमिली ने उनकी दिलचस्पी के बावजूद खड़गे को आगे कर दिया। इनकी यह कसक उनके ट्वीट में एक दोहे से छलक पड़ी है. हालाँकि उन्होंने खुद को राजाओं का राजा भी बताया है. 

दरअसल कल मल्लिकार्जुन खड़गे को नामांकन कराने के बाद आज दिग्विजय सिंह ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने रहीम दास के एक दोहे की चर्चा की, दोहे का भाव कुछ इस तरह है जिसे किसी चीज़ की चाह नहीं होती है, उसका मन बेपरवाह होता है और वो राजाओं का राजा होता है. दिग्विजय ने एक तरह से अपने को सांत्वना दी है और लोगों को बताया है कि उन्हें किसी चीज़ की चाहत नहीं है. लेकिन चाहत न होती तो कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन फॉर्म क्यों खरीदते? बहरहाल मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद दिग्विजय सिंह जिस शालीनता के साथ अपने कदम पीछे हटाए उससे आला कमान की नज़रों में उनका कद यकीनन बढ़ा होगा, सुना जा रहा है कि खड़गे अगर अध्यक्ष चुने जाते हैं तो राज्यसभा में लीडर ऑफ़ अपोज़िशन के पद को त्यागना पड़ेगा क्योंकि एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत सामने आएगा और ऐसे में इस बात की पूरी उम्मीद है कि राज्यसभा में खड़गे की जगह दिग्विजय को मिलेगी। 

बता दें कि अशोक गेहलोत की कांग्रेस अध्यक्ष उम्मीदवारी के रूप में अनिच्छा सामने आने और राजस्थान पर रार बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी उम्मीदवारी का दावा ठोंका था, उन्होंने पहले कहा कि मैं भी इस रेस में शामिल हूँ. फिर उन्होंने नॉमिनेशन फॉर्म लेकर इस बात को थोड़ा और पुख्ता किया. 29 सितम्बर की रात तक यही बात हो रही थी कि शशि थरूर और दिग्विजय सिंह में मुकाबला होगा मगर रात में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीती ने पलटा खाया और मल्लिकार्जुन काज उम्मीदवार बनकर सामने आय गए, जिसके बाद दिग्विजय सिंह ने आज्ञाकारी बालक की तरह अपने आप को अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग कर लिया।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related