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Tripura Election: त्रिपुरा में मुश्किल हुई भाजपा की राह

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त्रिपुरा में भाजपा की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए सीपीआई (एम) ने कांग्रेस पार्टी से हाथ मिला लिया है. 25 बरस तक त्रिपुरा में सत्ता पर कब्ज़ा किये बैठी सीपीआई (एम) को 2019 में भाजपा ने सत्ता से बेदखल कर इस पहाड़ी राज में कमल खिलाया था. इससे पहले इस राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट के बीच ही सत्ता को हासिल करने की लड़ाई चलती थी. 2019 में भाजपा का यहाँ पर जीतना एक बहुत बड़ा अपसेट माना जा रहा था क्योंकि त्रिपुरा सीपीआई (एम) का गढ़ समझा जाता था जिसे तोडना कांग्रेस पार्टी के लिए भी मुश्किल माना जा रहा था.

दुश्मन का दुश्मन दोस्त

तो दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाली राह पर चलते हुए सीपीआई (एम) और कांग्रेस पार्टी ने आने वाले विधानसभा चुनाव में साथ आने का फैसला कर भाजपा के मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. कांग्रेस महासचिव अजय कुमार ने शुक्रवार की शाम सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी के साथ बैठक के बाद इस गठबंधन की घोषणा की. अजय कुमार ने मीडिया से कहा कि सीटों के बंटवारे और रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए माकपा के राज्य सचिव के राज्य कांग्रेस की एक टीम साथ बैठेगी। बता दें कि त्रिपुरा में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

असली मुद्दा भगवा ब्रिगेड को सत्ता से हटाना

सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने कहा कि माकपा और कांग्रेस ने भाजपा को हराने के लिए ‘खुले दिमाग’ से चर्चा शुरू की है, उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों से त्रिपुरा में भाजपा सरकार ‘संवैधानिक व्यवस्था को नष्ट’ कर रही है। सीटों के बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कि यह बात ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, असली मुद्दा भगवा ब्रिगेड को सत्ता से हटाना है. कांग्रेस और सीपीआई एम का एकसाथ आना राज्य की राजनीति में एक बड़ा और दुर्लभ कदम माना जा रहा है.

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