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Petrol Diesel: जून में डीजल Demand घटी, पेट्रोल की मांग में तेजी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

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Petrol Diesle: देश में पेट्रोल और डीजल का दाम एक साल से अधिक समय से बदला नहीं है। पेट्रोल और डीजल की खपत और मांग में अंतर देखा जा रहा है। जून 2023 माह में डीजल की मांग में कमी आई। जबकि पेट्रोल की मांग तेजी से बढ़ गई। देश में अल्टरनेटिव फ्यूल जैसे इलेक्ट्रिक, बायोडीजल को बढ़ावा देने की बात की जा रही है। लेकिन अभी भी इकोनॉमी पहिया पेट्रोल-डीजल पर घूम रहा है। कार और बाइक के अलावा बस और अन्य वाहन में इस्तेमाल होने वाला ईंधन डीजल और पेट्रोल ही है। उसका 40 फीसद डीजल इन वाहनों में इस्तेमाल होता है। लेकिन जून 2023 में डीजल के मांग में गिरावट देखी गई है। इसके उलट पेट्रोल की मांग बढ़ी है।

जून में डीजल मांग पिछले साल के मुकाबले 3.7 प्रतिशत घटकर महज 71 लाख टन पर पहुंच गई। जबकि पेट्रोल डिमांड 3.4 प्रतिशत बढ़कर 29 लाख टन पर पहुंची है। महीने के हिसाब से देखें तो May में Diesel Sale 70.9 लाख टन रही। जबकि Petrol की मांग जून के बराबर थी।

कार के एसी ने बढ़ाई पेट्रोल मांग

पेट्रोल की मांग में बढ़ोतरी का ट्रेंड अप्रैल-मई में शुरू हो गया था। जून में अपने पीक पर पहुंच गया। जून में गर्मी और उमस से लोगों की कार में AC का अधिक इस्तेमाल हुआ। इस वजह से वाहनों में Petrol consumption अधिक हुई है।

डीजल की डिमांड बढ़ी, फिर गिरी

इसके उलट डीजल मांग मार्च महीने के आखिरी 15 दिन में बढी लेकिन अप्रैल और मई में भी तेजी आई। अप्रैल में डीजल मांग 6.7 प्रतिशत बढ़ी जबकि मई में ये 9.3 फीसद तक बढ़ गई। मांग बढ़ने की प्रमुख वजह कृषि सेक्टर में डीजल मांग का बना रहना था। जून का महीना आते ही मानसून आ पहुंचा और कृषि सेक्टर में सिंचाई के के लिए जो डीजल जेनसेट का इस्तेमाल होता है। उसमें कमी आने लगी, नतीजा डीजल की मांग गिर गई।

पेट्रोल मांग कोविड समय से ज्यादा

पेट्रोल और डीजल की खपत में बदलाव जून में काफी बड़े अंतर को दिखाता है। पेट्रोल के मामले में देखा जाए तो जून 2023 में खपत कोविड काल यानी जून 2021 के मुकाबले 33.5 प्रतिशत अधिक है। जबकि Covid 19 से पहले जून 2019 के मुकाबले 20.6 प्रतिशत अधिक है।
देश में पेट्रोल और डीजल की डिमांड में उतार-चढ़ाव काफी मायने रखता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल बाहर से आयात करता है। वह दुनिया में क्रूड ऑयल का तीसरा बड़ा इंपोर्टर है और हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।

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