फिल्मों में गूंज रहे मेरठी अनंत के डायलाॅग

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फिल्मों में गूंज रहे मेरठी अनंत के डायलाॅग

  • ओटीटी प्लेटफार्म पर कल रिलीज हो रही है अनंत की वेब सीरीज
  • डायलाॅग राइटिंग के साथ अभिनय के क्षेत्र में भी रखा कदम

सुनील शर्मा

मेरठ। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में मेरठ के डायलाॅग राइटर अनंत के डायलाॅगो की धमक दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। अनेक टीवी शो के लिये डायलाॅग लिख चुके अनंत अहलूवालिया अब ओटीटी प्लेटफार्म पर नयी शुरूआत कर रहे हैं। कल ओटीटी प्लेटफार्म पर उनकी वेब सीरीज अस्सी नब्बे पूरे सौ रिलीज होने जा रही है। इस वेब सीरीज के डाॅयलाग लिखने के साथ अनंत ने इस सीरीज में अभिनय भी किया है। अनंत अहलूवालिया से खास बातचीत में ‘बिजनेस बाइट्स’ ने उनके सफलता पाने के सफर में किये संघर्षों के बारे में विस्तार से जाना।

स्कूल-काॅलेज से ही था लिखने का शौक

मेरठ के सदर क्षेत्र में रहने वाले अनंत अहलूवालिया एक नामी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इंद्रजीत सिंह अहलूवालिया के पुुत्र अनंत ने सीएबी इंटर काॅलेज और मेरठ काॅलेज में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान अपने भीतर छिपे राइटर की झलक लोगों को दिखाना शुरू कर दिया था। स्कूल-काॅलेजों में होने वाले नाटक और उनके लिये लिखे डायलाॅगों ने लोगो को प्रभावित किया। उनकी प्रतिभा को देखकर लोगों ने अनंत को काॅलेज के बाद राइटर बनने की सलाह दी। जिसके बाद अनंत ने लेखन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिये मुंबई जाने की सोची।

फिल्मों में गूंज रहे मेरठी अनंत के डायलाॅग

मां ने दिया सपनों को पूरा करने का हौसला

आम भारतीय परिवारों की तरह अनंत के परिवारजन भी चाहते थे की वो कोई कोर्स करके साॅफ्टवेयर इंजिनियर बन जायें। राइटिंग जैसे अंजान क्षेत्र में करियर बनाने की सोच किसी को समझ नहीं आयी। वहीं रिश्तेदार भी उनके इस निर्णय के समर्थन में नहीं थे। ऐसे में उनकी माता प्रेमवती अहलूवालिया उनका सहारा बनीं और उन्होंने अनंत से कहा कि जिस काम को करने में आदमी को सुकून मिले उसे वही काम करना चाहिये। जिस काम को करने का मन न हो उसके लिये लड़ने वाला धैर्य खो देता है। मां की प्रेरणा और उत्साहवर्धन ने अनंत को अपने मन का काम करने का हौसला दिया और वह चल पडे़ मुंबई अपने सपनो को पूरा करने के लिये।

टीवी सीरियल से हुई शुरूआत, अब किया वेब सीरिज में काम

मायानगरी मुंबई पहुंचे अनंत ने काम की तलाश शुरू की तो संघर्षों का नया दौर शुरू हो गया। कभी सही आदमी नहीं मिलता तो कभी सही आदमी से समय नहीं मिला। लेकिन अनंत ने हौसला नहीं खोया और अपनेे लक्ष्य को पूरा करने के लिये निरंतर संघर्ष करते रहे। एक दिन उन्हें सफलता मिली और सब टीवी पर आने वाले सीरियल ‘अम्मा जी की गली’ से उन्होंने डायलाॅग राइटिंग के क्षेत्र में शुरूआत की। इसके बाद टीवी सीरियलों में उन्हें काम मिलता गया और उन्होंने कई सीरियलों के लिये डायलाॅग लिखे। अनंत का सफर आगे बढ़ा और उन्होंने ‘पोस्टर ब्वाॅय’ और ‘यमला-पगला-दीवाना फिर से’ फिल्म में बतौर एडिशनल डायलाॅग राइटर काम किया। अब अनंत की नयी शुरूआत ओटीटी प्लेटफार्म से होने जा रही है और कल 9 मार्च को उल्लू ऐप पर उनकी वेब सीरीज ‘अस्सी नब्बे पूरे सौ’ रिलीज होने जा रही है। अनंत के एक और उपलब्धि यह है कि वो इस वेब सीरीज में डायलाॅग राइटर होने के साथ पाॅकिस्तानी काॅंस्टेबल का किरदार निभाते भी नजर आयेंगे।

फिल्मों में गूंज रहे मेरठी अनंत के डायलाॅग

लक्ष्य निर्धारित करें, धैर्य बनाये रखें

मेरठ शहर से निकल कर मुंबई में नाम कमा रहे अनंत अहलूवालिया का कहना है कि सफलता हासिल करने के लिये जरूरी है कि लक्ष्य निर्धारित करने के बाद संघर्ष करें और धैर्य रखकर आगे बढ़ते जाये। परिणाम की चिंता किये बिना अपनी जर्नी का आंनद लेें क्योंकि मंजिल पर पहुंचने के बाद फिर एक नयी मंजिल की ओर नया सफर शुरू हो जायेगा। अपने मन का काम करने की बजाये औरों की सोच के मुताबिक चलने से सफलता मिलना मुश्किल है। इसलिये लोगों की परवाह न करें और खुद पर भरोसा रखे। आपको मिली कामयाबी एक दिन लोगों की सोच को बदल देगी। राइटिंग को अपना पैशन बताने वाले अनंत का कहना है कि राइटर बनने के लिये पढना और लिखना जरूरी है। फिल्में देखें और समझें की क्या नहीं लिखना है। कामयाबी पाने के लिये सही व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। यदि आपकी कला किसी को समझ नहीं आये तो बजाये खुद में कमी निकालने के यह समझ लेना चाहिये की सामने वाला व्यक्ति आपकी प्रतिभा को समझने के लिये सही व्यक्ति नहीं है।

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