धर्मेंद्र हमेशा रहेंगे इस हीरोइन के कर्जदार

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बॉलीवुड के ‘ही मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र ने अपने छह दशक के करियर में कई फिल्में की हैं। उन्होंने तनुजा से लेकर हेमा मालिनी, जया प्रदा, माला सिन्हा, वहीदा रहमान, नंदा और सायरा बानो के साथ काम किया। धर्मेंद्र के लिए उनकी हर हीरोइन खास रही है। हर हीरोइन से जुड़ी हैं खूबसूरत यादें, जिन्हें धर्मेंद्र अपने दिल में संजोकर रखते हैं। लेकिन एक हीरोइन ऐसी भी थी जिसका कर्ज धर्मेंद्र कभी नहीं चुका पाएंगे. इस हीरोइन ने उस मुश्किल वक्त में धर्मेंद्र का हाथ थामा था, जब दूसरों ने उन्हें ठुकरा दिया था। जब इस हीरोइन की मौत हुई तो धर्मेंद्र को गहरा सदमा लगा। इस हीरोइन का गोविंदा से भी खास रिश्ता था।

ये थीं कुमकुम, जो थीं धर्मेंद्र की पहली हीरोइन. धर्मेंद्र ने कुमकुम के साथ 1960 में आई फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ में काम किया था। यह धर्मेंद्र की पहली फिल्म थी। वहीं कुमकुम तब तक कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं. उन्होंने 50 के दशक में फिल्मों में कदम रखा.

गुरुदत्त की खोज थी ‘कुमकुम’, शादी के बाद छोड़ दी इंडस्ट्री

कुमकुम को गुरुदत्त की खोज कहा जाता था. उन्होंने ही एक्ट्रेस को फिल्मों में लॉन्च किया था. गुरु दत्त ने 1950 में कुमकुम को ‘आर पार’ गाने में कास्ट किया। इसके बाद गुरु दत्त की ‘प्यासा’ और ‘मिस्टर’ में नजर आईं , कुमकुम क्लासिक फिल्मों के दौर की टॉप एक्ट्रेस मानी जाती थीं। फिर उन्हें फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाने में कोई झिझक नहीं हुई। लेकिन शादी के बाद कुमकुम ने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया.

कुमकुम ने धर्मेंद्र के करियर में अहम भूमिका निभाई

कुमकुम ने धर्मेंद्र के करियर और जिंदगी में अहम भूमिका निभाई। इस बारे में धर्मेंद्र ने कहा था, ‘कुमकुम’ फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ में काम करने के लिए तैयार हो गई थीं। जबकि उस समय तक वह ‘प्यासा’, ‘मदर इंडिया’ और ‘नया दौर’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम कर चुकी थीं। कुमकुम जी से मैंने सीखा कि नये लोगों के प्रति विनम्र रहें। मैं कभी नहीं भूल सकता कि कुमकुम मेरे प्रति कितनी दयालु और विनम्र थी। उन्होंने मुझे घर जैसा महसूस कराया। मेरे और मेरे परिवार के बारे में बात की. मेरी जिंदगी में दिलचस्पी दिखाई. शॉट्स में मेरी मदद की. मैं सदैव उनका ऋणी रहूँगा।

इस फिल्म में धर्मेंद्र बने थे कुमकुम के भाई

रामानंद सागर की 1968 में आई फिल्म ‘आंखें’ में कुमकुम ने एक बार फिर धर्मेंद्र की बहन का किरदार निभाया। दोनों ने 1972 में आई फिल्म ‘ललकार’ में भी साथ काम किया था।

गोविंदा को मानते थे बेटे, मां से था ये रिश्ता

कुमकुम ने फिल्मी करियर को अलविदा कहने के बाद सबसे रिश्ता तोड़ दिया था . लेकिन गोविंदा के साथ रिश्ता बनाए रखा. वह गोविंदा को अपना बेटा मानती थीं। दरअसल, गोविंदा की मां निर्मला देवी कुमकुम की सौतेली बहन थीं। कहा जाता है कि कुमकुम का डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर से भी खास रिश्ता था। आशुतोष गोवारिकर आज भी कुमकुम के बंगले में रहते हैं और आज भी उस बंगले का नाम अभिनेत्री के नाम पर है।

धर्मेंद्र का फिल्मी करियर

1960 में डेब्यू करने के बाद धर्मेंद्र ने अपनी कुछ पहली फिल्मों में सहायक भूमिकाएँ निभाईं। बाद में उन्होंने ‘बंदिनी’, ‘दिल ने फिर याद किया’, ‘दुल्हन एक रात की’, ‘बहारें फिर आएंगी’, ‘फूल और पत्थर’ समेत दर्जनों फिल्में कीं। ‘फूल और पत्थर’ धर्मेंद्र की पहली एक्शन फिल्म थी। 1975 तक धर्मेंद्र की छवि एक सदाबहार हीरो की बन गई थी, जो कोई भी किरदार निभा सकता था। धर्मेंद्र आज 87 साल के हैं और आज भी एक्टिंग में सक्रिय हैं। हाल ही में वह करण जौहर की फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में नजर आए। फिल्म में शबाना आजमी के साथ धर्मेंद्र के किसिंग सीन की भी काफी चर्चा है.

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