Kamleshwar Mahadev Mandir – निसंतान दंपत्ति की आस्था के आगे विज्ञान पड़ जाता है कमजोर

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श्रीनगर गढ़वाल – उत्तराखंड में स्थित सैकड़ों धार्मिक स्थलों की अपनी धार्मिक मान्यताएं और इतिहास हैं. आज हम आपको एक ऐसे धार्मिक स्थल के बारे में बताते हैं जहां आस्था और विश्वास के आगे विज्ञान भी कमजोर पड़ जाता है. हम बात कर रहे हैं पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर (Kamleshwar Mahadev Mandir) की. जहां पर निसंतान दंपति के लिए यह मंदिर उम्मीद की एक किरण है, माना जाता है कि निसंतान दंपत्ति यहां खड़े दिए के साथ भगवान शिव का जप करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है. श्रीनगर अलकनंदा के किनारे स्थित कमलेश्वर मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी के दिन लगने वाले मेले में शामिल होने के लिए सैकड़ों हजारों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते है.

धार्मिक मान्यता

कमलेश्वर महादेव मंदिर (Kamleshwar Mahadev Mandir) की धार्मिक मान्यता भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र हासिल करने से जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र हासिल करने के लिए भोलेनाथ की 1 हजार कमल द्वारा आराधना कर रहे थे. तब भगवान शिव ने विष्णु की परीक्षा लेने के लिए एक कमल को छुपा दिया. जिसके बाद पूजा करने में एक कमल की कमी भगवान विष्णु को महसूस हुई. उन्होंने इस कमी को पूरा करने के लिए अपनी आंखों को कमल के तौर पर उपयोग करने का निर्णय लिया. जिससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र प्रदान किया. कहा जाता है कि भगवान विष्णु के आंखें यानी कमल के नाम पर इस मंदिर का नाम कमलेश्वर महादेव मंदिर पड़ा.

बैकुंठ चतुर्दशी की खास मान्यता

यूं तो साल भर कमलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. लेकिन बैकुंठ चतुर्दशी के दिन मंदिर में विशेष अनुष्ठान किया जाता है. इस दिन यहां एक धार्मिक मेले का आयोजन भी होता है जिसमें हजारों भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर मेले का आनंद उठाते हैं. मान्यता है कि बैकुंठ चतुर्दशी के दिन निसंतान दंपति रात भर घी का जलता हुआ दीपक लेकर भगवान शिव की स्तुति करते हैं. जिसे खड़े दीए की आराधना कहा जाता है.

शिवलिंग की विशेष आराधना

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन निसंतान दंपत्ति के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण होती है मान्यता है कि बैकुंठ चतुर्दशी के दिन बेदनी बेला पर शुरू होने वाले इस व्रत में रात्रि 2:00 बजे शिवलिंग के समक्ष एक विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. जिसमें 100 व्यंजनों का भोग लगाकर शिवलिंग को मक्खन से ढक दिया जाता है. इसके बाद दंपत्ति अपना अनुष्ठान पूरा करते हैं. जिसमें दंपति जलता हुआ दीपक लेकर पूरी रात ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप खड़े रहकर करना होता है

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