Surya Grahan 2022: 25 अक्टूबर को लग रे खंडग्रास सूर्यग्रहण के दौरान करें ये काम

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25 अक्टूबर 2022 दिन मंगलवार को खंडग्रास सूर्यग्रहण लग रहा है। ग्रहण सूर्य हो या फिर चंद्रमा का। ग्रहण के दौरान संयम और सावधानी से किए कार्य का कई गुना फल मिलता है। चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम के साथ जप-ध्यान करने का फल प्राप्त होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ॐ नमो नारायणाय’ ‘मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घी को पीते हैं। ऐसा करने से मेधा, कवित्वशक्ति तथा वाक सिद्धि प्राप्त होती है। सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितना अन्न खाता है। उतने वर्षों तक नरक में वास करता है।

सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर 12 घंटे, पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर यानी 9 घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। ग्रहण.वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं। वे दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन पकाना चाहिए। ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग अत्यावश्यक परिस्थिति में करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं नहीं उपयोग करना चाहिए।

ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय में होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोए बिना स्नान कर सकती हैं। ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र दोनों में जिसका भी हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर ही भोजन करना चाहिए। ग्रहणकाल में स्पर्श किए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए। ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल का उपयोग श्रेष्ठ होगा। भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ जल और सरोवर की अपेक्षा नदी का जल पवित्र माना जाता है।

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान देने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सुअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। ऐसा ज्योतिषाचार्यों का मानना है।

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