Buda Kedar Mandir- पांडवों के कष्ट दूर करने को शिव ने लिया बूढ़े का रूप

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टिहरी गढ़वाल- उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा में आपने केदारनाथ मंदिर मंदिर की धार्मिक महत्ता और पौराणिकता के बारे में सुना ही होगा. आज हम आपको उत्तराखंड के ऐसे केदार मंदिर की बारे में बताते हैं जिसे ‘बूढ़ा केदार मंदिर’ (Buda Kedar Mandir) के नाम से जाना जाता है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल बूढ़ा केदार मंदिर अपने धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. इस मंदिर को उत्तराखंड का पांचवा केदार भी कहा जाता है. यूं तो वर्ष भर यहां पर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. लेकिन सावन की कावड़ यात्रा के दौरान यहां पर दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या में इजाफा देखने को मिलता है. बूढ़ा केदार मंदिर को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है.

बूढ़ा केदार मंदिर की धार्मिक मान्यताएं

उत्तराखंड के टिहरी जिले जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. समुद्र तल से 4400 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर हिंदुओं की धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि गोत्र हत्या हत्या से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने इसी स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी. पांडवों की तपस्या से खुश होकर भगवान भोलेनाथ ने एक बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन दिए थे. जिसके बाद इस स्थान का नाम बूढ़ा केदार पड़ा. कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य उन्हें बूढ़ा केदारनाथ धाम की नींव रखी थी. मंदिर के अंदर पत्थर की एक शिला है जिस पर पांडवों की आकृति उभरी हुई हैं. माना जाता है कि प्राचीन काल में केदारनाथ पैदल यात्रा का यह मुख्य पड़ाव था. प्राचीन काल में बूढ़ा केदार धाम के दर्शन किए बिना केदारनाथ की यात्रा अधूरी ही मानी जाती थी.

श्रावण मास होता है खास

भगवान भोलेनाथ को सावन का महीना बहुत ही प्रिय है. यही वजह है कि देशभर के शिवालय में श्रावण मास में भक्तों की संख्या में इजाफा देखने को मिलता है. बूढ़ा केदार मंदिर में भी इस महीने बाबा के भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. यह मंदिर बालगंगा और धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित है. कहा जाता है कि धार्मिक मान्यताओं को समेटे हुए बूढ़ा केदार मंदिर में स्थापित शिवलिंग एक स्वयं निर्मित शिवलिंग है. मान्यता है कि पांडवों को बूढ़े व्यक्ति के रूप में दर्शन देने के बाद भगवान शिव पत्थर रूप में परिवर्तित हुए जिसने शिव लिंग का आकार ले लिया था.

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