मेरठ। इस बार महाशिवरात्रि मंगलवार (Mahashivratri) के दिन 1 मार्च को धनिष्ठा नक्षत्र तथा परिध शिव व सिद्धयोग में उस समय पड़ रही हैं जब चन्द्रमा मकर राशि पर होंगे और सूर्य कुम्भ राशि पर। जिसमें भद्रा प्रारम्भ का समय रात्रि 3ः18 से दोपहर 2 बजकर 08 मिनट तक है। महानिशीथ काल रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से रात्रि 12 बजकर 58 मिनट तक विशेष है।
फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि मे भगवान शिव (God Shiva) का विवाह देवी सती के संग हुआ था। यह महारात्रि शिव व शक्ति के मिलन की पूरे ब्रह्माण्ड की विशेष रात्रि है। अतः यदि ज्योतिषीय सूक्ष्मताओं एवं नियमो का पालन करते हुएए विशेषतः शिव उपासना की जाये तो यह शिवरात्रि जीवन के अनेक पहलुओं मे परम शुभदायी हो सकती है।
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ये है पूजा का शुभ मुहूर्त :
चार प्रहर रात्रि पूजन का विशेष मुहूर्त है। प्रथम प्रहर सुबह 6:16, द्वितीय प्रहर सुबह 9:24 तृतीय प्रहर दोपहर 12:33 और चतुर्थ प्रहर दोपहर बाद 3:41 पर है। महा शिवरात्रि दिवस पूजन मुहूर्त को देखे तो अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:56 बजे तक,लाभामृत मुहूर्त सुबह 11:07 बजे से 02:00 बजे तक,शुभ मुहूर्त दोपहर बाद 03:27 बजे से04:54 बजे तक रहेगा।
ऐसे करें महादेव की उपासना (Puja Vidhi):
महादेव उपासना से करें ज्योतिषीय कुयोगों का शमन .चाहे समस्या स्वास्थ्य संबंधी हो, चाहे आर्थिक, चाहे सामाजिक, चाहे चन्द्र, राहु, केतु, शनि आदि ग्रहों से संबंधित समस्या हो अथवा केमद्रुम योग, सकट योग, काल सर्प योग, पितृ दोष तथा चाहे सर्प श्राप के निवारण करने हो सभी श्रावण मास उस पर भी शिवरात्रि जैसा हर्षोल्लास पूर्ण शिव शक्ति का पर्व हो अर्थात शिव शक्ति की वैवाहिक वर्षगांठ का उत्सव हो तो ऐसे मे भोले नाथ क्यों न प्रसन्न होंगे, हमारे थोडे से भी प्रयासों से। Read also- वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के लिए नया ऐप
निम्न अभिषेक द्रव्य प्रयोग करें :
धन प्राप्ति के लिए गन्ने का रस।
पशुधन प्राप्ति के लिए दही।
रोग निवारण हेतू कुशा युक्त जल।
स्थिर लक्ष्मी के लिए घी एवं शहद।
पुत्र प्राप्ति के लिए शर्करा मिश्रित दूध।
संतान प्राप्ति के लिए गौ का दूध।
वंश वृद्धि एवं आरोग्य हेतू घी।
बुखार दूर करने के लिए जल।
विरोधियों से मुक्ति के लिए सरसों का तेल।
तपेदिक रोग से मुक्ति के लिए शहद।
इस तरह से शिवलिंग (Shivling) पर फूलपत्र चढाए : फूल, फल और पत्ते पेडों पर जैसे उगते हैं ठीक उसी तरह से दाहिने हाथ की हथेली को सीधा करके मध्यमा अनामिका और अंगूठे की सहायता से इस प्रकार चढाये कि फूल फल का मुख ऊपर की ओर रहे। दूर्वा व तुलसीदल को अपनी और करके तथा बेल के तीनों पत्ते बिना कटे फटे नीचे औंधा मुखी करके चढाने चाहिए। यदि शिवलिंग से पुष्प, फूल, फल, पत्ते हटाने हो तो केवल तर्जनी और अंगूठे का प्रयोग करके ही उतारें।

