उत्तराखंड में धामी सरकार की कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता यानि यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी है. बता दें कि मुख्यमंत्री धामी ने सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली यूसीसी मसौदा समिति ने शुक्रवार को मसौदा सौंपा था. यूसीसी मसौदा पैनल में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, सोशल वर्कर मनु गौड़, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह और दून यूनिवर्सिटी की कुलपति सुरेखा डंगवाल भी शामिल थीं. कैबिनेट द्वारा पास किये गये प्रस्ताव को विधेयक के रूप में छह फरवरी को सदन में पेश किया जायेगा. बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र 5-8 फरवरी बुलाया गया है.
मसौदा मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने बताया था कि यूसीसी ड्राफ्ट पर 2,33,000 लोगों ने सुझाव दिए हैं. मसौदा रिपोर्ट लगभग 740 पेज लंबी और 4 खंडों में है. UCC राज्य में जाति और धर्म के बावजूद सभी समुदायों के लिए समान नागरिक कानून का प्रस्ताव करता है. यह सभी नागरिकों के लिए समान विवाह, तलाक, भूमि, संपत्ति और विरासत कानूनों के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा. उत्तराखंड में UCC बिल का पारित होना 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य के लोगों से भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए एक प्रमुख वादे की पूर्ति का प्रतीक होगा.
5 फरवरी से शुरू हो रहे उत्तराखंड विधानसभा सत्र के चलते जिला प्रशासन ने विधानसभा परिसर के आसपास 300 मीटर के दायरे में धारा 144 लगा दी है. देहरादून की जिलाधिकारी सोनिका ने कहा कि सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान निर्दिष्ट क्षेत्र में संगठनों और समुदायों के प्रदर्शन जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा.
कैबिनेट द्वारा पारित UCC प्रस्ताव में कहा गया है कि विवाह पर सभी धर्मों में एक समान व्यवस्था होगी. बहुविवाह पर रोक का प्रस्ताव रखा गया है. बहुविवाह को मंजूरी नहीं दी जाएगी. सभी धर्म के लोगों को शादी का पंजीकरण कराना जरूरी होगा. सभी धर्मों बच्चियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल निर्धारित की गयी है. सभी धर्म के लोगों में बच्चों को गोद लेने का अधिकार की वकालत की गई है. मुसलमानों में होने वाले इद्दत और हलाला पर रोक लगे. सभी धर्मों में तलाक को लेकर एक समान कानून और व्यवस्था हो. पर्सनल लॉ के तहत तलाक देने पर रोक लगाई जाए. लिव-इन रिलेशनशिप रहने पर इसकी जानकारी अपने माता-पिता को देनी जरूरी होगी. ऐसे लोगों में पुलिस में भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा. उत्तराधिकार में बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बराबर अधिकार मिले.