देवीधुरा। अल्मोड़ा जिले से करीब 75 किमी की दूरी पर है स्थित है विश्व प्रसिद्ध देवीधुरा मंदिर। जहां पर मां वाराही विराजमान हैं। देवीधुरा चंपावत जिले में है। जहां पर देवी की प्रतिमा एक संदूक में बंद करके रखी गई है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि देवी दिगंबर शक्ति और बज्र के रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि कोई भी श्रद्धालुगण अपनी खुली आंखों से मां को नहीं देख सकता। यदि कोई देवी की प्रतिमा को देख लेता है तो उसकी आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिए देवी को संदूक में रखा जाता है। बग्वाल के दूसरे दिन देवी की प्रतिमा को साल में एक बार संदूक से बाहर निकालते हैं। इसके बाद उनको स्नान कराया जाता है। देवी की प्रतिमा को स्नान कराने के दौरान स्नान कराने वाले की आंखों पर पट्टी बांधी जाती है। वाराही मंदिर में भीम शिला देखने को मिलेगी। मान्यता है कि जब पांडव अज्ञातवास में आए थे तो वह एक जगह पर रुके थे। भीम को एक बार गुस्सा आ गया था जिसके बाद उन्होंने इस बड़े पत्थर को दो हिस्सों में बांट दिया था। कहा जाता है कि भीम द्वारा पत्थर पर जो तलवार मारी थी। इसके बीच से लोग सिक्का डाला करते थे और वहां से खनकने की आवाज सुनाई देती है।
जिन महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती वह इस मंदिर में आकर देवी के डोले के चारों तरफ बैठकर पूजा करती हैं। साथ ही रात में महिलाएं हाथ में दीया लेकर पूजा करती हैं। मान्यता है कि देवी के आशीर्वाद के रूप में महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। मंदिर प्रांगण में एक पत्थर है। जिसको उठाने से रोग और कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि इस पत्थर को वही लोग उठा सकते हैं। जिनका मन साफ हो। इस पत्थर को पांच लोग अपनी दो उंगली से उठा सकते हैं। मंदिर के पुजारी चंद्र प्रकाश ने बताया कि देवी यहां शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुगण आते हैं। इसके अलावा जब पांडव अज्ञातवास में आए थे तो वे यहीं पर रुके थे। देवी वाराही का मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है और शाम करीब सात बजे मंदिर बंद होता है। मंदिर में प्रतिदिन दुर्गा देवी की आरती होती है।
