एक ज़माना था जब सफ़ेद रंग की अम्बेसडर कार को VIP का दर्जा प्राप्त था, या एक तरह से इसे सरकारी गाड़ी भी कहा जाता था. सिर्फ सरकारी ही नहीं फिएट जैसे दूसरे मॉडल की कारें भी सफ़ेद रंग की ही पसंद की जाती थी। मारुति कंपनी के आने के बाद कार बाजार में एक क्रांति आयी, घर घर मारुती कार दिखाई देने लगी मगर लोगों की पहली पसंद सफ़ेद रंग ही रहा. इसके बाद भारतीय कार बाजार जेट की रफ़्तार से आगे बढ़ा, दुनिया की ऐसी कोई कार कंपनी शायद नहीं होगी जिसकी कारें भारत की सड़कों पर न दौड़ रही हों, इनमें ज़्यादातर विदेशी कार कंपनियों का भारत में ही प्रोडक्शन हो रहा है। ज़्यादा कारों का मतलब ज़्यादा तरह के लोग और ज़्यादा तरह की सोच, इसके बावजूद सफ़ेद कारों का बाज़ार कभी कम नहीं हुआ और ये रुझान 2020 के दशक तक बरक़रार रहा लेकिन उसके बाद अब इस रुझान में थोड़ा बदलाव आने लगा है और सफ़ेद रंग की जगह दूसरे रंग लेने लगे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक ये बदलाव 2020 के बाद दिखने लगा, 2021 की बात करें तो देश में सफ़ेद रंग की कारों की बिक्री लगभग 44 प्रतिशत थी लेकिन 2022 में इसमें दो प्रतिशत की कमी आ गयी और पिछले साल यानि 2023 में ये घटकर 39 प्रतिशत पर आ गयी. अब सफ़ेद कार की जगह काला रंग लेता जा रहा है, आंकड़ों को देखें तो 2021 में सिर्फ 14 प्रतिशत लोगों ने काले रंग की कार खरीदी लेकिन अगले ही साल इसमें डेढ़ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और 2023 में इसमें काफी इज़ाफ़ा हुआ और काले रंग की कारों ने लगभग बीस प्रतिशत बाज़ार पर कब्ज़ा कर लिया।
आज सड़कों पर हमें काफी रंग बिरंगी कारें नज़र आती हैं, कार कंपनियों के जो स्पेशल एडिशन आते हैं उनमें सफ़ेद रंग की जगह अलग तरह के कलर होते हैं। दरअसल आज कार इस्तेमाल करने वालों में युवा पीढ़ी की संख्या काफी बढ़ गयी है और युवाओं की रंगीन तबियत का रंग उनकी कारों पर चढ़ा दिखता है. इसकी एक और बड़ी वजह ये है कि आज के दौर में लोगों के घरों में एक से ज़्यादा कारें दिखने लगी हैं जिसमें एक कार अगर सफ़ेद है तो दूसरी कार 99 प्रतिशत दूसरे रंग की ही होती है. कारों के रंगों के प्रति विविधता के लिए एक और बात भी काफी अहम् है. आम तौर पर कार या दोपहिया वाहन खरीदने से पहले लोग इस बात का ज़रूर ख्याल रखते थे कि किस रंग के वाहन की रीसेल वैल्यू ज़्यादा है. पहले सिर्फ सफेद रंग की कार की रीसेल वैल्यू मिलती थी लेकिन अब दूसरे रंगों की कारों की भी रीसेल वैल्यू अच्छी है यही वजह कि अब दूसरे रंग की कारों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है, हालाँकि आज भी सफ़ेद रंग लोगों की प्राथमिकता में है, 40 प्रतिशत लोग आज भी इसी रंग की कार को खरीदना पसंद करते हैं।