एक समय जब ट्विटर से मोदी सरकार और भाजपा के रिश्तों कुछ खटास आ गयी थी तब अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिदावतका ने देशी ट्विटर ‘कू’ की शुरआत की थी और फिर सरकार और भाजपा से जुड़े लोगों ने धड़ाधड़ इस प्लेटफॉर्म कोई ज्वाइन किया था, कहा जा रहा था कि हमें ट्विटर की ज़रुरत अब नहीं, हमारे पास अपना सोशल प्लेटफॉर्म है, तब देश के बड़े बड़े लोगों में कू एप्प को ज्वाइन करने की होड़ लग गयी थी और कू को VIP या बड़े लोगों का प्लेटफॉर्म कहा जाने लगा था लेकिन इस एप्प से आम यूज़र दूर ही रहा और आज खबर ये आयी है कि ये VIP एप्प आधिकारिक रूप से बंद हो गया है. इस बात की जानकारी और किसी ने नहीं बल्कि Koo के संस्थापकों ने दी है।
संस्थापकों ने बताया कि साझेदारी की बातचीत विफल होने और उच्च प्रौद्योगिकी लागत के कारण इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बंद किया गया है। कंपनी ने अप्रैल 2023 से ही कर्मचारियों की संख्या कम करना शुरू कर दिया था। एक समय ऐसा भी था जब Koo के रोजाना सक्रिय यूजर्स की संख्या 21 लाख तक पहुंच गई थी। इतना ही नहीं कंपनी के मासिक सक्रिय यूजर्स की संख्या 1 करोड़ तक पहुंच गई थी। इस प्लेटफॉर्म पर 9 हजार वीआईपी लोगों के अकाउंट थे। भाजपा नेताओं ने इस प्लेटफॉर्म का खूब प्रचार भी किया था। इस प्लेटफॉर्म को देसी ट्विटर के रूप में प्रचारित किया जा रहा था। हालांकि इतनी सफलता के बावजूद वित्तीय समस्याओं से जूझ रही कंपनी को अपना कारोबार बंद करना पड़ा है।
संस्थापकों ने Koo के बंद होने की वजह टेक्नोलॉजी की कीमत और अप्रत्याशित मार्केट कैपिटल बताई है। इसके साथ ही संस्थापकों ने कंपनी की कुछ संपत्तियों को बेचने की इच्छा भी जताई है। संस्थापक की ओर से जारी नोट में कहा गया है, ‘हमें इन संपत्तियों को उन लोगों के साथ साझा करने में खुशी होगी जो भारतीय सोशल मीडिया में कुछ बड़ा करने की सोचते हैं।
