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फरार बदन सिंह बद्दो की कोठी की ध्वस्तीकरण की करवाई शुरू


फरार बदन सिंह बद्दो की कोठी की ध्वस्तीकरण की करवाई शुरू

मेरठ। पुलिस हिरासत से फरार ढाई लाख के इनामी बदमाश बदन सिंह बद्दों की पंजाबीपुरा स्थित कोठी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आज सुबह से शुरु कर दी गई। भारी संख्या में फोर्स की मौजूदगी में कार्रवाई की जा रही है।कोठी की कीमत करीब दो करोड़़ बतायी जा रही है। मेरठ की मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किये जाने के बाद आज ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।


गौरतलब है कि मेरठ का कुख्यात बदन सिंह बद्दो 28 मार्च 2019 को फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से गाजियाबाद कोर्ट में पेशी पर आया था। दिल्ली रोड पर होटल मुकुट महल में रूका बदन सिंह बद्दो पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था। इस मामले में कई आरोपियों पर पुलिस कार्रवाई का शिकंजा कसा और गिरफ्तारियां भी की गयीं। बददो और उसके साथी डिपीन सूरी, पपीत बढ़ला पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की जा चुकी है। फरार बदन सिंह बद्दों पर पुलिस ने ढाई लाख का इनाम घोषित किया था।


कुछ दिनों पहले पुलिस ने बदन सिंह बद्दो की टीपीनगर थाना क्षेत्र के पंजाबीपुरा में बनी कोठी पर कुर्की की कार्रवाई की थी। इस दौरान इस कोठी का निर्माण बिना मानक पूरे किये करने का मामला सामने आया था। लगभग दो करोड़ कीमत की इस कोठी की देखरेख बद्दो की भाभी कर रही थीं। एमडीए की ओर से कई बार बद्दो की भाभी कुलदीप कौर से कोठी का मानचित्र व अन्य दस्तावेज मांगे गये। कुलदीप कौर को एमडीए की तरफ से 07 नवंबर, 17 नवंबर, 25 नवंबर और 07 जनवरी को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए। कुलदीप कौर एमडीए के सामने अपना पक्ष रखने में नाकाम रहीं। जिसके बाद एमडीए अध्यक्ष/कमिश्नर अनीता सी.मेश्राम ने मंगलवार को कोठी ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।

आज सुबह टी पी नगर थानाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता फोर्स को लेकर कोठी पर पहुंचे। वहाँ पर ओपचारिकता पूरी करने की बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। बद्दो के परिवार की ओर से विरोध मामूली रहा और कार्रवाई आगे चलती रही।


इनामी अपराधी बदन सिंह बद्दो की कोठी की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए एमडीए को पर्याप्त पुलिस फोर्स उपलब्ध कराया गया है। ब्रह्मपुरी, टीपीनगर और परतापुर पुलिस के साथ-साथ पीएसी और आरएएफ भी लगा दी गई है। वहीं बद्दो की कोठी को गिरता देखने के लिए लोगो की भीड़ लगी रही। वहीं कार्रवाई पर शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की निगाह भी लगी रही।

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